सोना खरीदना भारतीय परिवारों के लिए केवल निवेश नहीं, बल्कि एक भावना है. लेकिन अक्सर ग्राहकों के मन में यह डर रहता है कि कहीं उन्हें कम प्योरिटी का सोना तो नहीं थमाया जा रहा. अब आपकी इस चिंता का समाधान सरकार ने HUID कोड के रूप में कर दिया है.
सोना खरीदने से पहले देख लें ये 6 नंबर (AI Generated Image)
भारत में हॉलमार्किंग व्यवस्था की निगरानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) करता है. BIS द्वारा जारी HUID कोड हर गहने के लिए अलग और यूनिक होता है.
सोना खरीदने से पहले देख लें ये 6 नंबर
क्या होता है HUID कोड
HUID एक 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड होता है जो हर हॉलमार्क वाले सोने के गहने पर अंकित रहता है. यह कोड बताता है कि उस गहने की जांच किसी BIS मान्यता प्राप्त लैब में हुई है और उसकी शुद्धता प्रमाणित है.
क्यों जरूरी है हॉलमार्क
हॉलमार्किंग का मतलब है कि सोने की शुद्धता को वैज्ञानिक तरीके से जांचकर प्रमाणित किया गया है. उदाहरण के लिए 22 कैरेट सोने पर 916 लिखा होता है, जिसका मतलब है कि उसमें 91.6 फीसदी प्योर सोना है. इससे ग्राहक को भरोसा मिलता है कि वह जितना पैसा दे रहा है, उतनी ही प्योरिटी का सोना खरीद रहा है.
ऐसे चेक करें 6 अंकों का कोड
सोना खरीदते समय ग्राहक कुछ आसान तरीकों से इसकी जांच कर सकते हैं.
- गहने पर BIS का लोगो जरूर देखें.
- सोने की कैरेट और शुद्धता का नंबर (जैसे 22K916) चेक करें.
- 6 अंकों का HUID कोड गहने पर लिखा होना चाहिए.
- ज्वैलर का पहचान चिन्ह (ज्वैलर मार्क) भी मौजूद होना चाहिए.
मोबाइल से भी कर सकते हैं जांच
ग्राहक HUID कोड की पुष्टि मोबाइल से भी कर सकते हैं. इसके लिए BIS का आधिकारिक ऐप BIS CARE डाउनलोड करना होता है. ऐप में HUID नंबर डालते ही गहने की पूरी जानकारी सामने आ जाती है, जैसे उसकी प्योरिटी, परीक्षण केंद्र और ज्वैलर का विवरण.
नकली हॉलमार्क से बचने का तरीका
सोना खरीदते समय हमेशा विश्वसनीय और रजिस्टर्ड ज्वैलर से ही खरीदारी करें और बिल जरूर लें. अगर गहने पर HUID कोड नहीं है या जानकारी मैच नहीं कर रही है, तो तुरंत शिकायत भी की जा सकती है.
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