यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है, जब नेट प्रीमियम इनकम में तिमाही आधार पर हल्की गिरावट देखने को मिली. LIC की नेट प्रीमियम इनकम Q3 FY26 में बढ़कर 1.26 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो सालाना आधार पर 17 प्रतिशत अधिक है. पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी की नेट प्रीमियम इनकम 1.07 लाख करोड़ रुपये थी. हालांकि, तिमाही आधार पर नेट प्रीमियम इनकम में 0.7 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई.
पॉलिसी बिक्री और बिजनेस मिक्स
दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों की अवधि में व्यक्तिगत सेगमेंट में कुल 1,16,63,856 पॉलिसियां बेची गईं. यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,17,10,505 पॉलिसियों के मुकाबले 0.40 प्रतिशत कम है. एनुअलाइज्ड प्रीमियम इक्विवेलेंट के आधार पर 9MFY26 में कुल प्रीमियम 44,007 करोड़ रुपये रहा. इसमें से 62.61 प्रतिशत यानी 27,552 करोड़ रुपये व्यक्तिगत बिजनेस से आए, जबकि 37.39 प्रतिशत यानी 16,455 करोड़ रुपये ग्रुप बिजनेस से योगदान मिला.
व्यक्तिगत बिजनेस के भीतर, पार प्रोडक्ट्स का हिस्सा 63.54 प्रतिशत यानी 17,507 करोड़ रुपये रहा, जबकि नॉन पार प्रोडक्ट्स का योगदान 36.46 प्रतिशत यानी 10,045 करोड़ रुपये रहा. नॉन पार सेगमेंट में खास तौर पर मजबूत ग्रोथ देखने को मिली, जहां एपीई 47.44 प्रतिशत बढ़ा है.
क्या होती हैं पार पॉलिसीज
इंश्योरेंस की दुनिया में पार (Par) प्रोडक्ट्स का मतलब होता है पार्टिसिपेटिंग पॉलिसी. ये ऐसी जीवन बीमा योजनाएं हैं जो बीमा कंपनी के मुनाफे में आपको हिस्सेदार बनाती हैं. सरल शब्दों में कहें तो जब आप ऐसी पॉलिसी लेते हैं, तो कंपनी अपने बिजनेस से होने वाले लाभ का एक हिस्सा बोनस के रूप में आपके साथ साझा करती है.
VNB, सॉल्वेंसी और एसेट्स में सुधार
नौ महीनों की अवधि में वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस 27.96 प्रतिशत बढ़कर 8,288 करोड़ रुपये हो गई. इसी अवधि में नेट VNB मार्जिन 170 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 18.8 प्रतिशत पर पहुंच गया. 31 दिसंबर 2025 तक LIC का सॉल्वेंसी रेशियो बढ़कर 2.19 हो गया, जो एक साल पहले 2.02 था. वहीं, एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 8.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. कंपनी का ओवरऑल एक्सपेंस रेशियो भी घटकर 11.65 प्रतिशत रह गया, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार का संकेत देता है.
एलआईसी के शेयर
एलआईसी के शेयर गुरुवार को एनएसई पर 0.56 फीसदी की तेजी के साथ 840 रुपये पर बंद हुए. बीते 6 महीने में इस शेयर ने 5 फीसदी से ज्यादा का नुकसान कराया है. वहीं, बात इस साल अब तक के रिटर्न की करें तो यह -1.50 फीसदी दिखता है.
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