Tata Moters Loss : टाटा मोटर्स ने दिसंबर तिमाही में 3.5 हजार करोड़ रुपये का घाटा बताया है, जबकि उसकी नेक्सॉन एसयूवी देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी बन गई है.
टाटा मोटर्स को दिसंबर तिमाही में 3500 करोड़ का घाटा हुआ है.
कंपनी ने बताया है कि पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में 5,485 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया था. इसका मतलब है कि महज एक साल में ही कंपनी इतने मोटे मुनाफे से सीधे 3.5 हजार करोड़ रुपये के घाटे में पहुंच गई. टाटा समूह की कंपनी टीएमपीवीएल ने बताया है कि समीक्षाधीन तिमाही में उसकी एकीकृत परिचालन आय घटकर 70,108 करोड़ रुपये रह गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 94,472 करोड़ रुपये थी.
1,600 करोड़ का बढ़ गया खर्चा
कंपनी के मुताबिक, बीती तिमाही में उसे कुल 1,600 करोड़ रुपये का असाधारण खर्च उठाना पड़ा था, जिसने कमाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. इसमें जेएलआर में हुई साइबर घटना से जुड़े 800 करोड़ रुपये, नए श्रम कानून लागू होने से संबंधित 400 करोड़ रुपये और स्टाम्प शुल्क के 400 करोड़ रुपये शामिल हैं. कंपनी को इन खर्चों की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है. इसके अलावा भी कुछ और कारण हैं कि जिसकी वजह से कंपनी को इतना तगड़ा नुकसान हुआ है.
नुकसान का सबसे बड़ा कारण क्या
टाटा मोटर्स को नुकसान होने का सबसे बड़ा कारण जेएलआर के ऑपरेशंस पर साइबर हमला था. इससे प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ और रेवेन्यू में भी भारी गिरावट आई. सिर्फ जेएलआर की कमाई की बात करें तो यह 39.4 फीसदी गिर गया. इस तरह, कंपनी को 21 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा. इससे कंपनी के कुल रेवेन्यू में 26 फीसदी की गिरावट आई है. कंपनी को यह नुकसान भारत के बाहर के प्रोडक्शन की वजह से हुआ है, जबकि देश में टाटा मोटर्स की बिक्री अच्छी रही. यहां कंपनी को नुकसान नहीं हुआ है.
क्या रिकवरी की उम्मीद है
कंपनी को पूरा भरोसा है कि इस गिरावट के बावजूद जेएलआर जल्द ही मजबूत रिकवरी कर लेगी और घरेलू ऑपरेशंस में सुधार जारी रहेगा. वैसे यह कंपनी के लिए बड़ा घाटा है, लेकिन पैसेंजर्स वाहन सेग्मेंट में कंपनी का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है और जल्द ही यह दोबारा मुनाफे में लौट आएगी. वैसे भी टाटा मोटर्स ने सबसे बड़ा दांव जेएलआर पर लगाया है, जहां प्रोडक्शन कम होने की वजह से उसे नुकसान उठाना पड़ा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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