कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की संभावित कमी को लेकर रेस्टोरेंट उद्योग में चिंता बढ़ गई है. रेस्टोरेंट्स के संगठन ने सरकार से गैस की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है. सरकार के हालिया निर्देश के बाद वितरकों में कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है. उद्योग का कहना है कि अगर गैस की आपूर्ति बाधित हुई तो कई रेस्टोरेंट्स को बंद करना पड़ सकता है.
कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई पर संकट का खतरा, NRAI ने सरकार को लिखा पत्र. (Image:AI)
सरकार के आदेश के बाद बढ़ी चिंता
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने 7 मार्च को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर अपनी चिंता जताई है. संगठन का कहना है कि 5 मार्च को जारी सरकारी निर्देश के बाद गैस वितरकों में भ्रम की स्थिति बन गई है. इस आदेश में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके बाद कई सप्लायर्स ने संकेत दिए हैं कि रेस्टोरेंट्स को मिलने वाले कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी रोकी जा सकती है.
रेस्टोरेंट सेक्टर पूरी तरह LPG पर निर्भर
रेस्टोरेंट उद्योग का कहना है कि उसका अधिकांश संचालन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर ही आधारित है. ऐसे में अगर गैस की आपूर्ति रुकती है तो देशभर में बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट्स बंद हो सकते हैं. संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी परेशानी हो सकती है क्योंकि लाखों लोग रोजाना खाने के लिए रेस्टोरेंट्स और फूड आउटलेट्स पर निर्भर रहते हैं. कोरोना लॉकडाउन के समय भी भोजन आपूर्ति को जरूरी सेवा माना गया था.
लाखों रोजगार पर पड़ सकता है असर
NRAI के मुताबिक देश में लगभग पांच लाख से ज्यादा रेस्टोरेंट इस उद्योग से जुड़े हैं और इसका सालाना कारोबार करीब 5.7 लाख करोड़ रुपये का है. इस सेक्टर में सीधे तौर पर 80 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है. संगठन के अध्यक्ष सागर दरयानी ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार के अन्य विभागों से भी संपर्क किया जा रहा है. फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर कोई प्रतिबंध लगाया जाएगा या नहीं.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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