इसी पृष्ठभूमि में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे वैश्विक अस्थिरता के दौर में धैर्य बनाए रखें और घबराहट में निवेश से जुड़े फैसले न लें. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर अल्पकाल में बाजारों पर जरूर पड़ता है, लेकिन मजबूत आर्थिक आधार लंबे समय में बाजारों को स्थिर बनाए रखते हैं.
मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी बाजार में अनिश्चितता
सेबी चेयरमैन के मुताबिक ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष वैश्विक बाजारों में अस्थिरता की बड़ी वजह बन रहा है. इस तनाव के कारण कई महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग और शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रवाह पर असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों में व्यवधान और आपूर्ति में रुकावट के कारण बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर निवेशकों की भावनाओं पर भी दिखाई दे रहा है.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
तुहिन कांत पांडे ने कहा कि इस संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ी है. ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन, उत्पादन लागत और कई अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है, जिससे वैश्विक आर्थिक माहौल पर दबाव बनता है.
घबराकर फैसले न लें निवेशक
सेबी प्रमुख ने निवेशकों को सलाह दी कि बाजार के अल्पकालिक उतार चढ़ाव पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए. उनका कहना था कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में शांत रहना और सोच समझकर निवेश से जुड़े फैसले लेना बेहद जरूरी होता है.
भारत के आर्थिक आधार मजबूत
तुहिन कांत पांडे ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक मजबूत बने हुए हैं. उनके मुताबिक यही मजबूत आधार भारत के वित्तीय बाजारों को स्थिरता प्रदान करता है और लंबे समय में निवेशकों के भरोसे को बनाए रखता है.
निफ्टी की 30 साल की यात्रा का जिक्र
इस मौके पर उन्होंने भारतीय पूंजी बाजार के विकास पर भी बात की. उन्होंने निफ्टी 50 सूचकांक की 30 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह भारत की अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट सेक्टर के विकास को दर्शाता है. उनके अनुसार निफ्टी की वृद्धि देश की आर्थिक प्रगति और पूंजी बाजारों में बढ़ती निवेशक भागीदारी से गहराई से जुड़ी हुई है.
बाजार ढांचे में आया बड़ा बदलाव
सेबी चेयरमैन ने कहा कि समय के साथ भारत के पूंजी बाजार का ढांचा भी काफी मजबूत हुआ है. स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी जैसी संस्थाएं लगातार विकसित हुई हैं और अब वित्तीय प्रणाली को बेहतर तरीके से सहारा दे रही हैं.
तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि बाजार की निगरानी और संचालन में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है. इसी दिशा में सेबी ने प्रतिभूति बाजार के लिए तकनीकी रोडमैप तैयार करने के लिए विशेषज्ञों का एक समूह भी बनाया है. नियामक ने बाजार निगरानी के लिए कई उन्नत तकनीकी उपकरण भी शुरू किए हैं. इनमें सुदर्शन प्लेटफॉर्म शामिल है, जो डिजिटल बाजार गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी करता है. इसके अलावा सेबी रडार नाम की प्रणाली भी लागू की गई है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विज्ञापनों का विश्लेषण करके संभावित भ्रामक सामग्री की पहचान करती है.
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