ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने BRICS की साझा मुद्रा की अटकलों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि डीडॉलराइजेशन को लेकर फैली चर्चाएं गलतफहमी पर आधारित हैं. लूला ने भारत-ब्राजील के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार की वकालत की. साथ ही उन्होंने संतुलित और बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया.
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला बोले-BRICS नई करेंसी नहीं बना रहा.(Image:AP)
स्थानीय मुद्रा में व्यापार की वकालत
लूला ने कहा कि भारत और ब्राजील जैसे देशों को यह सोचने की जरूरत है कि क्या हर व्यापारिक समझौता अमेरिकी डॉलर में ही होना चाहिए. उनका मानना है कि दोनों देश अपनी-अपनी स्थानीय मुद्रा में व्यापार कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन कोशिश की जा सकती है. उन्होंने साफ किया कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार का विचार डॉलर-विरोधी नहीं है, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाना है.
डॉलर की ताकत और वैश्विक संतुलन
ब्राजील के राष्ट्रपति ने माना कि अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत मुद्रा है और अमेरिका स्वाभाविक रूप से अन्य मुद्राओं के उभार का विरोध करेगा. उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था रातों-रात नहीं बदल सकती. ब्रिक्स को उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बताया और कहा कि भारत और चीन जैसे देशों की बड़ी आबादी इसे और प्रभावशाली बनाती है. लूला ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्राजील किसी नए शीत युद्ध या भू-राजनीतिक टकराव का समर्थन नहीं करता, बल्कि वह सभी देशों के साथ संतुलित व्यापार चाहता है.
भारत-ब्राजील व्यापार में नई संभावनाएं
लूला ने उम्मीद जताई कि भारत और ब्राजील के बीच व्यापार 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. उन्होंने भारत के तकनीकी इकोसिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि भारत से सीखने के लिए बहुत कुछ है. साथ ही ब्राजील को भी एक बड़ा बाजार बताते हुए भारतीय कंपनियों को वहां निवेश के अवसरों का लाभ उठाने का न्योता दिया. उन्होंने यह भी घोषणा की कि ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खोलेगी, ताकि सप्लाई चेन को अधिक विविध बनाया जा सके.
बहुपक्षीय दुनिया की ओर संदेश
लूला ने खुद को बहुपक्षवाद का समर्थक बताते हुए कहा कि ब्रिक्स एक संतुलित विश्व व्यवस्था की उम्मीद है. उनका मानना है कि जब भारत और ब्राजील जैसी अर्थव्यवस्थाएं बढ़ेंगी, तो आपसी व्यापार भी तेजी से बढ़ेगा और दोनों देशों को फायदा होगा. उन्होंने साफ संकेत दिया कि ब्रिक्स का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि सहयोग के जरिए विकास को आगे बढ़ाना है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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