इस लड़ाई के केंद्र में हैं स्केल एआई के युवा फाउंडर अलेक्जांडर वांग (Alexandr Wang), जिन्हें 14 अरब डॉलर (1.2 लाख करोड़ रुपये) की डील के बाद मेटा में लाया गया. जुकरबर्ग ने उन्हें एआई के नए युग का लीडर माना, लेकिन कंपनी के भीतर कई सीनियर एग्जीक्यूटिव और रिसर्चर मानते हैं कि वांग के पास इतनी बड़ी एआई रणनीति संभालने का अनुभव नहीं है. यही टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है.
जुकरबर्ग और वांग के बीच बढ़ता तनाव
कंपनी के भीतर चर्चा है कि अलेक्जांडर वांग (Alexandr Wang) को मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) का बेहद करीबी मैनेजमेंट स्टाइल दम घोंटने जैसा लगता है. वांग को जिस आजादी के वादे के साथ लाया गया था, नई संरचना ने साबित कर दिया कि अंतिम फैसला अब भी जुकरबर्ग के हाथ में रहेगा. वांग की सोच सुपरइंटेलिजेंस बनाने की है, जबकि जुकरबर्ग हर कदम पर सीधा कंट्रोल रखना चाहते हैं.
एआई की दिशा पर टकराव
पिछले साल एक अहम मीटिंग में वांग की टीबीडी लैब टीम का सामना मेटा के पुराने दिग्गज क्रिस कॉक्स (Chris Cox) और एंड्रयू बोसवर्थ (Andrew Bosworth) से हुआ. पुराने नेतृत्व का मानना था कि नए एआई मॉडल को फेसबुक और इंस्टाग्राम के डेटा पर ट्रेन कर एडवर्टाइजिंग बिजनेस मजबूत किया जाए. वांग ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि पहले ओपनएआई और गूगल के मॉडल्स को पकड़ना जरूरी है. उनके मुताबिक प्रोडक्ट के हिसाब से एआई को ढालने से प्रोग्रेस धीमी हो जाएगी.
कंपनी के भीतर हम बनाम वे की सोच
वांग की रिसर्च टीम खुद को भविष्य की सुपरइंटेलिजेंस बनाने वाली ताकत मानती है. दूसरी तरफ पुराने एग्जीक्यूटिव्स को सोशल मीडिया दौर के प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में देखा जा रहा है. इस सोच ने मेटा के भीतर दो खेमे बना दिए हैं. एक तरफ सुपरइंटेलिजेंस की रेस. दूसरी तरफ फीड और एडवर्टाइजिंग को बचाने की रणनीति.
बजट को लेकर अंदरूनी खुसर फुसर
कंपनी के अंदर चर्चा है कि रियलिटी लैब्स के बजट से करीब 2 अरब डॉलर वांग की एआई टीम को ट्रांसफर किए गए. मेटा ने इस आंकड़े से इनकार किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक फंड शिफ्ट होने से पुराने डिवीजन में नाराजगी बढ़ी है.
बड़े नामों का बाहर निकलना
मेटा के दिग्गज एआई वैज्ञानिक यान लेकुन (Yann LeCun) ने नवंबर 2025 में कंपनी छोड़ दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक वे उस स्थिति से असहज थे जहां उन्हें डेटा लेबलिंग बैकग्राउंड वाले लीडर के अंडर रिपोर्ट करना पड़ता. यह एआई रिसर्च विंग के भीतर गहरी असंतुष्टि का संकेत माना जा रहा है.
नई रीऑर्गेनाइजेशन से बदला पावर स्ट्रक्चर
इस हफ्ते मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने मेटा कंप्यूट नाम की नई टॉप लेवल पहल की घोषणा की. इसके जरिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और एआई फैसलों को सीधे उनके कंट्रोल में लाया गया है. संतोष जनार्दन (Santosh Janardhan) और डेनियल ग्रॉस (Daniel Gross) को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि गवर्नमेंट रिलेशन की कमान डीना पॉवेल मैकॉर्मिक (Dina Powell McCormick) संभालेंगी. इस बदलाव ने साफ कर दिया कि वांग को मिली स्वायत्तता अब सीमित हो चुकी है.
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