अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को निरस्त कर दिया है, जिसका फायदा एशिया-प्रशांत के कुछ देशों को हो सकता है. मूडीज ने दावा किया है कि कोर्ट ने भले ही ट्रंप के खिलाफ फैसला दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति दूसरा कानूनी रास्ता जरूर तलाशेंगे. हालांकि, टैरिफ कम होने का फायदा चीन सहित कुछ देशों को होगा लेकिन भारत के साथ स्थिति दूसरी है. भारत ने हाल में अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर अंतरिम समझौता किया है, लेकिन नए फैसले के बाद इसमें काफी कुछ बदलाव की गुंजाइश है.
मूडीज ने कहा है कि ट्रंप के नए टैरिफ से कई देशों को फायदा होगा.
मूडीज ने कहा कि अभी काफी अनिश्चितता है, लेकिन हम कुछ बातें जानते हैं. 15 फीसदी का समान शुल्क उन एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं को लाभ पहुंचाएगा, जिन्हें कहीं अधिक शुल्क का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन के देश-विशिष्ट शुल्क के खिलाफ फैसला दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 फीसदी शुल्क लगा दिया. बाद में इसे बढ़ाकर 15 फीसदी करने की भी घोषणा की है. हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आदेश या अधिसूचना जारी नहीं की गई है.
ट्रेड डील पर भी फैसले का असर
मूडीज ने कहा कि अमेरिकी अदालत का फैसला भारत और इंडोनेशिया के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौतों पर भी सवाल उठाता है. प्रमुख विवरण जैसे कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे कम करने की समयसीमा और इंडोनेशिया से शुल्क-मुक्त वस्त्र निर्यात की मात्रा, अभी तय नहीं हुए हैं. इस बीच भारत ने अपने प्रतिनिधिमंडल को वॉशिंगटन भेजने की योजना भी टाल दी है. अदालत के फैसले से अमेरिका की देश-विशिष्ट शुल्क लगाने की शक्ति सीमित होती है, जिससे व्यापार वार्ताओं में उसका दबाव कम होता है. इसमें एक महीने से कुछ अधिक समय में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक भी शामिल है.
ट्रंप नए रास्ते तलाशेंगे
मूडीज ने कहा कि हमारा मानना है कि ट्रंप शुल्क बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी रास्ते खोजेंगे और हमें आश्चर्य नहीं होगा यदि अमेरिकी शुल्क शुक्रवार से पहले के स्तर के करीब पहुंच जाएं. कुछ सरकारें अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों के अनुमोदन की प्रक्रिया धीमी कर सकती हैं, लेकिन अधिक दंडात्मक शुल्क के डर से उनके पूरी तरह पीछे हटने की संभावना कम है. इसका मतलब है कि ट्रंप टैरिफ का डर आगे भी दिखाएंगे और दुनिया के अन्य देशों पर दबाव डालने की कोशिश करेंगे.
कंपनियां मांग सकती हैं मुआवजा
इसमें कहा गया कि शुल्क के अंततः 20 फरवरी से पहले लागू दर से नीचे स्थिर होने की सर्वोत्तम स्थिति में भी व्यापार में पर्याप्त अनिश्चितता और लॉजिस्टिक अव्यवस्था बनी रहेगी. साथ ही कंपनियां पहले से चुकाए गए शुल्क के लिए मुआवजा मांग सकती हैं. यह प्रक्रिया अत्यधिक विवादास्पद और समय लेने वाली साबित हो सकती है. यदि अमेरिकी आयातक इस फैसले को अस्थायी राहत मानते हैं, तो वे शुल्क फिर से बढ़ने से पहले माल भेजने की जल्दबाजी कर सकते हैं. संक्षेप में, यह फैसला क्षणिक राहत दे सकता है, लेकिन व्यवसायों एवं नीति-निर्माताओं के लिए बेहतर होगा कि वे अभी जश्न मनाने से बचें.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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