वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) के फंसे हुए लगभग $600 मिलियन (5,400 करोड़ रुपये से अधिक) के डिविडेंड को निकालने के लिए भारत सरकार ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं. हाल ही में वेनेजुएला में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों और अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद, भारत अब वाशिंगटन और कराकस (Caracas) दोनों के साथ बातचीत कर रहा है. माना जा रहा है कि अगर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो न केवल भारत को यह पैसा वापस मिलेगा, बल्कि ठप पड़ा तेल उत्पादन भी दोबारा शुरू हो सकेगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल पैसों का मामला नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है. वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है और भारत की रिफाइनरियां वहां का ‘भारी कच्चा तेल’ (Heavy Crude) प्रोसेस करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं. यदि यह गतिरोध खत्म होता है, तो ओएनजीसी न केवल अपने पुराने $600 मिलियन वसूल पाएगी, बल्कि वहां उत्पादन को 10 गुना तक बढ़ाकर 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जा सकती है.
क्या है पूरा विवाद और अब तक की स्थिति?
OVL का पैसा फंसने के पीछे मुख्य रूप से अमेरिकी पाबंदियों का हाथ रहा है:
- सान क्रिस्टोबाल प्रोजेक्ट: ओएनजीसी ने 2008 में इस प्रोजेक्ट में निवेश किया था. 2014 तक का करीब $536 मिलियन का डिविडेंड बकाया है, जो बाद के सालों को मिलाकर करीब $1 बिलियन तक पहुंच सकता है.
- उत्पादन में गिरावट: प्रतिबंधों की वजह से तकनीक और उपकरणों की कमी हुई, जिससे जो कुआं 1 लाख बैरल तेल दे सकता था, वह घटकर महज 5-10 हजार बैरल पर सिमट गया.
- पेमेंट का संकट: वेनेजुएला की आर्थिक हालत और डॉलर ट्रांजैक्शन पर रोक के कारण कैश पेमेंट मुमकिन नहीं हो पा रहा था. भारत ने पहले तेल के बदले बकाया चुकाने (Oil-for-Dues) का प्रस्ताव भी दिया था.
2026 में क्यों बढ़ी उम्मीदें?
जनवरी 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला में आए भू-राजनीतिक बदलावों ने समीकरण बदल दिए हैं:
- अमेरिकी रुख में बदलाव: अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को फिर से खड़ा करने में रुचि दिखा रहा है. इससे ओएनजीसी जैसी कंपनियों के लिए ‘विशेष लाइसेंस’ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है.
- डिविडेंड की रिकवरी: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज और अन्य विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के नियंत्रण या समर्थन वाली नई व्यवस्था में ओएनजीसी को अपना बकाया मिलने की संभावना 80% तक बढ़ गई है.
- नई मशीनों की तैयारी: ओएनजीसी ने गुजरात के तेल क्षेत्रों में खाली पड़ी ड्रिलिंग रिग्स को वेनेजुएला भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी है, ताकि काम शुरू होते ही उत्पादन बढ़ाया जा सके.
भारत की रणनीति: अमेरिका से बातचीत
भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ ‘ट्रांजैक्शनल’ (लेन-देन वाली) कूटनीति अपना रहा है. भारत का तर्क है कि वह केवल अपनी पुरानी अटकी हुई कमाई वापस मांग रहा है. यदि अमेरिका की ओर से हरी झंडी मिलती है, तो भारतीय रिफाइनरियां रूस के बाद वेनेजुएला को अपना एक मुख्य तेल आपूर्तिकर्ता बना सकती हैं. इससे भारत को खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और कच्चे तेल की कीमतों पर मोलभाव करने की ताकत भी बढ़ेगी.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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