अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने कहा है कि भारत को अगले महीने Pax Silica में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया जाएगा. दिसंबर में जब इस ग्रुप की शुरुआत हुई थी तब भारत को शुरुआती मेंबर्स में जगह नहीं मिली थी. इसके बाद दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं. अब अमेरिका ने साफ कर दिया है कि भारत को इस पहल का सबसे अहम पार्टनर माना जा रहा है.
Pax Silica क्या है और क्यों बनाया गया
Pax Silica अमेरिका की अगुवाई में बना एक इंटरनेशनल टेक और सप्लाई चेन नेटवर्क है. इसका मकसद सिलिकॉन बेस्ड इंडस्ट्री की पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है. इसमें सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड फैब्रिकेशन, AI डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी इनपुट्स, लॉजिस्टिक्स और क्रिटिकल मिनरल्स शामिल हैं. सरल भाषा में समझें तो आज मोबाइल फोन से लेकर कार, मिसाइल सिस्टम और डेटा सेंटर तक हर जगह चिप्स की जरूरत है. अभी इस चेन का बड़ा हिस्सा कुछ सीमित देशों और खासकर चीन पर निर्भर है. Pax Silica का लक्ष्य इस निर्भरता को कम करना और भरोसेमंद पार्टनर्स के साथ वैकल्पिक नेटवर्क खड़ा करना है.
दिसंबर में भारत क्यों नहीं था ग्रुप में
जब Pax Silica लॉन्च हुआ तब जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, यूके, इजराइल, UAE और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश फाउंडिंग मेंबर्स बने. भारत उस लिस्ट में नहीं था. अमेरिकी अधिकारियों ने उस वक्त कहा था कि भारत एक हाई स्ट्रैटेजिक पार्टनर है लेकिन शुरुआती ग्रुप छोटा रखा गया है. इसके बाद भारत में यह सवाल उठा कि सेमीकंडक्टर और टेक मैन्युफैक्चरिंग में उभरते देश को बाहर क्यों रखा गया. अब ताजा बयान से साफ है कि अमेरिका भारत को इस फ्रेमवर्क में सेंट्रल रोल देना चाहता है.
भारत के लिए इस मेंबरशिप का असली मतलब
भारत अभी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में शुरुआती स्टेज पर है. चिप फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग और AI हार्डवेयर में बड़ी टेक्नोलॉजी और कैपिटल की जरूरत होती है. Pax Silica में एंट्री से भारत को जॉइंट वेंचर, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और को इन्वेस्टमेंट के मौके मिल सकते हैं. क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट में भी भारत की निर्भरता आयात पर है. इस ग्रुप के जरिए सप्लाई चेन सिक्योरिटी बेहतर हो सकती है. इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को लंबी अवधि का फायदा मिलेगा.
China plus one स्ट्रैटेजी और भारत का मौका
ग्लोबल कंपनियां अब मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहतीं. इसी को China plus one स्ट्रैटेजी कहा जाता है. Pax Silica इसी सोच का टेक्नोलॉजी वर्जन है. अगर भारत इस ग्रुप में मजबूत रोल निभाता है तो सेमीकंडक्टर और AI हार्डवेयर की ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत को बड़ा हिस्सा मिल सकता है. हाल के महीनों में बड़े टेक इन्वेस्टमेंट्स पहले ही भारत की तरफ झुकाव दिखा चुके हैं. माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और गूगल (Google) जैसे प्लेयर्स भारत में AI और डेटा सेंटर नेटवर्क पर भारी निवेश कर रहे हैं. Pax Silica से इन प्रोजेक्ट्स को इंटरनेशनल सपोर्ट और तेजी मिल सकती है.
ट्रेड डील और डिप्लोमेसी का नया एंगल
अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर बातचीत भी साथ साथ चल रही है. Pax Silica में भारत की एंट्री केवल टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि डिप्लोमेसी का भी बड़ा सिग्नल मानी जा रही है. सर्जियो गोर ने इसे एक बार में जीवन का मौका बताया है जो दोनों देशों के रिश्तों को नए लेवल पर ले जा सकता है. आने वाले महीनों में अगर भारत को फुल मेंबरशिप का ऑफिशियल इनविटेशन मिलता है तो यह सिर्फ एक ग्रुप जॉइन करने की खबर नहीं होगी. यह संकेत होगा कि भारत अब ग्लोबल टेक पावर चेन में दर्शक नहीं बल्कि भागीदार बनने की ओर बढ़ रहा है.
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