2011 की जनगणना में गुजरात में शहरी आबादी 42.6% थी, जो देश के औसत 31.14% से काफी ज्यादा थी. अब 2027 तक यह 50.7% पार कर जाएगी यानी 16 साल में लगभग 8% की बढ़ोतरी होगी. यह रफ्तार देश के ऐवरेज से काफी तेज है. टाइम्स ऑफ इंडिया कि रिपोर्ट के अनुसार, शहरी विकास और शहरी आवास विभाग के प्रमुख सचिव एम. थेन्नारासन ने बताया कि शहर आर्थिक विकास के इंजन हैं. वे सेवाओं, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लान्ड डेवलपमेंट से चलते हैं. विश्व बैंक की एक स्टडी के मुताबिक 2050 तक गुजरात में 67-70% लोग शहरों में रह सकते हैं. सरकार ने इस साल को “अर्बन ईयर” घोषित किया है और शहरी विकास के लिए बजट बढ़ाकर 33,500 करोड़ रुपये कर दिया है. फोकस बेहतर सुविधाओं, सैटेलाइट टाउनशिप और ट्रांजिट-ओरिएंटेड ग्रोथ पर है.
शहरों की संख्या बढ़ी
2011 में गुजरात में सिर्फ 8 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन थे, अब यह संख्या 17 हो गई है. नवसारी, वापी, आनंद, मोरबी, गांधीधम जैसे नए शहर शामिल हुए. म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत क्षेत्र 466 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 481 वर्ग किलोमीटर हो गया. अहमदाबाद जैसे बड़े शहर अब सानंद तक फैलने वाले हैं, जो इंडस्ट्रियल हब है.
CEPT यूनिवर्सिटी के अर्बन प्लानर रुतुल जोशी कहते हैं, “गुजरात औद्योगिक राज्य रहा है. इंडस्ट्री के साथ शहर आते हैं. 1980 से ही अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट में शहरी आबादी पीक पर थी. प्लानर्स को 2025 तक शहरों की आबादी गांवों से ज्यादा होने की उम्मीद थी.” अब 2036 तक शहरी आबादी 55% हो सकती है, जबकि देश में तब भी ज्यादातर लोग गांवों में रहेंगे (39.1% शहरी). गुजरात में शहरी आबादी सालाना 0.5% बढ़ रही है, जबकि देश में सिर्फ 0.3%. अगले 10 साल में गुजरात में 4.3% बढ़ोतरी का अनुमान है, देश में सिर्फ 2.7%.
बिहार और गुजरात के प्रति व्यक्ति आय में अंतर
बिहार और गुजरात की प्रति व्यक्ति आय (per capita income) में भी बड़ा फर्क है, जो दोनों राज्यों के आर्थिक विकास और शहरीकरण के स्तर को दिखाता है. राज्य आर्थिक सर्वे के आंकड़ों और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, (2024-25 और 2025-26 के अनुमानों) के अनुसार, गुजरात की प्रति व्यक्ति NSDP (Net State Domestic Product) वर्तमान कीमतों पर लगभग ₹3,36,875 से ₹3,71,016 (2023-24 से 2024-25) तक पहुंच गई है, जो USD में करीब $4,000 के आसपास है और कई रिपोर्ट्स में 2025-26 के लिए USD 4,827 तक अनुमानित है. यह देश के टॉप राज्यों में शुमार है. वहीं बिहार, जो देश का सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाला राज्य है, 2024-25 में ₹69,321 से ₹76,490 (वर्तमान कीमतों पर) तक पहुंचा है, जो USD में लगभग $900-1,200 के बीच है. यह गुजरात से लगभग 4-5 गुना कम है. यह अंतर मुख्य रूप से गुजरात के तेज शहरीकरण (50%+ शहरी आबादी), इंडस्ट्री और बेहतर नौकरियों से है, जबकि बिहार अभी भी ज्यादातर ग्रामीण और कृषि-आधारित है, हालांकि हाल के सालों में बिहार की जीएसडीपी ग्रोथ राष्ट्रीय औसत से ज्यादा (13%+) रही है, लेकिन जनसंख्या ज्यादा होने से प्रति व्यक्ति आय कम बनी हुई है.
गुजरात और बिहार की कमाई और विकास में बड़ा फैसला
गुजरात का यह शहरीकरण आर्थिक ताकत दिखाता है क्योंकि यहां इंडस्ट्रियल विकास, अच्छी सड़कें, मेट्रो, बेहतर नौकरियां हैं. जिससे औसत कमाई लाखों में पहुंच गई है. गुजरात देश की टॉप अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, जहां लोग अच्छी जिंदगी जी रहे हैं. लेकिन बिहार अभी भी 50 साल पीछे है, हां शहरीकरण बहुत कम है. ज्यादातर लोग गांवों में रहते हैं, कमाई कम है, इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है. गुजरात की तरह बिहार में भी इंडस्ट्री और शहर बढ़ाने की जरूरत है, ताकि लोग मजबूरी में नहीं, बल्कि बेहतर जीवन के लिए शहर आएं. गुजरात सरकार सैटेलाइट टाउन जैसे सानंद, सावली, कलोल, बड़ौली, हिरासर विकसित कर रही है, ताकि बड़े शहरों पर दबाव कम हो और विकास संतुलित रहे. यह बदलाव गुजरात को विकसित भारत का मॉडल बना रहा है. लेकिन बिहार जैसे राज्यों को भी तेजी से शहरीकरण और इंडस्ट्रियल ग्रोथ की जरूरत है.
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