सरकार ने स्टार्टअप इंडिया (Startup India) की परिभाषा में बड़ा बदलाव करते हुए डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग कैटेगरी बना दी है. 4 फरवरी 2026 को जारी गजट नोटिफिकेशन के तहत ऐसे स्टार्टअप्स को अब 20 साल तक मान्यता मिलेगी और 300 करोड रुपये तक के टर्नओवर की छूट दी जाएगी. इसका मकसद साइंस और इंजीनियरिंग आधारित इनोवेशन को बढ़ावा देना है. नई व्यवस्था के तहत डीप टेक स्टार्टअप्स को लंबी टैक्स छूट, ज्यादा निवेश की सुविधा और रिसर्च पर खर्च की मान्यता मिलेगी. साथ ही फंड के इस्तेमाल पर सख्ती भी बढ़ाई गई है ताकि पैसा सिर्फ कोर बिजनेस और इनोवेशन में ही लगे.
सरकार का मानना है कि डीप टेक स्टार्टअप्स पारंपरिक स्टार्टअप्स से अलग होते हैं क्योंकि इनमें रिसर्च और डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च होता है, प्रोडक्ट को बाजार में लाने में ज्यादा समय लगता है और तकनीकी अनिश्चितता भी अधिक रहती है. इसी वजह से इन्हें ज्यादा समय और समर्थन देने की जरूरत थी.
डीप टेक स्टार्टअप क्या होंगे
नई परिभाषा के अनुसार डीप टेक स्टार्टअप वे कंपनियां होंगी जो नई वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग जानकारी पर आधारित सॉल्यूशन विकसित करती हैं. इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस मटेरियल, स्पेस टेक और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं. ऐसे स्टार्टअप्स के पास खुद का या विकसित हो रहा मजबूत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी होना जरूरी होगा और उसे कमर्शियल बनाने की स्पष्ट योजना भी दिखानी होगी.
मान्यता की अवधि और टर्नओवर सीमा
डीप टेक स्टार्टअप्स को अब इनकॉरपोरेशन की तारीख से 20 साल तक स्टार्टअप का दर्जा मिलेगा. इसके साथ ही इनके लिए टर्नओवर की अधिकतम सीमा 300 करोड रुपये तय की गई है. वहीं सामान्य स्टार्टअप्स के लिए पहले की तरह 10 साल की मान्यता और 200 करोड रुपये की सीमा लागू रहेगी.
रजिस्ट्रेशन और टैक्स छूट की प्रक्रिया
स्टार्टअप्स को मान्यता के लिए डीपीआईआईटी (DPIIT) पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा. सामान्य स्टार्टअप्स की तरह डीप टेक स्टार्टअप्स को भी इनोवेशन और स्केलेबिलिटी का विवरण देना होगा, लेकिन इनके लिए अतिरिक्त तकनीकी और रिसर्च से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी. आयकर की धारा 80 आईएसी (Section 80 IAC) के तहत टैक्स छूट के लिए इंटर मिनिस्टीरियल बोर्ड से सर्टिफिकेशन जरूरी होगा.
फंड के इस्तेमाल पर सख्त नियम
सरकार ने फंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियम और कड़े कर दिए हैं. स्टार्टअप्स मान्यता अवधि के दौरान मिले फंड को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी, गैर जरूरी जमीन या इमारत, कोर बिजनेस से अलग लोन, दूसरी कंपनियों में निवेश, लग्जरी एसेट या सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों में नहीं लगा सकेंगे. हालांकि सरकार को विशेष मामलों में इन शर्तों में ढील देने का अधिकार रहेगा.
स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर
इस फैसले से भारत में डीप टेक इनोवेशन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. लंबी मान्यता अवधि और ज्यादा टर्नओवर सीमा से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और रिस्क कैपिटल को आकर्षित करने में मदद मिलेगी. सरकार का साफ संदेश है कि जो स्टार्टअप्स भविष्य की टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, उन्हें लंबी दौड़ के लिए तैयार किया जाएगा.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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