Success Story: कहते हैं कि अगर इरादे नेक हों और सोच में नयापन, तो सफलता की राह खुद-ब-खुद बन जाती है. दरभंगा की दो सहेलियों, मेघा और वंदना ने इसे सच कर दिखाया है. जहां आज के दौर में जंक फूड सेहत के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. वहीं इन दोनों ने हेल्दी पास्ता के स्टार्टअप के जरिए एक स्वस्थ विकल्प पेश किया है. जिसमें मैदा नहीं है. आज महीने का 300 टन खपत और सालाना 7 करोड़ का टर्नओवर है. आइए जानते हैं इनके सफर को.
मेघा और वंदना के इस सफर की शुरुआत घर की रसोई से हुई. उन्होंने महसूस किया कि बाजार में मिलने वाला पास्ता अक्सर मैदा और अरारोट से बना होता है, जो सेहत के लिए हानिकारक है. इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए उन्होंने 2024 में अपना स्टार्टअप शुरू किया. उनका मुख्य उद्देश्य था शुद्ध देसी और पौष्टिक आहार. इस पास्ता को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से मार्केट में बेचती है.

इनका पास्ता किसी मिलावट से नहीं, बल्कि गेहूं के आटे से निर्मित शुद्ध सूजी से तैयार किया जाता है. मेड इन इंडिया के संकल्प के साथ, उन्होंने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया. आज वे मात्र 42 रुपये प्रति किलो की किफायती दर पर यह हेल्दी पास्ता लोगों तक पहुंचा रही हैं, ताकि हर वर्ग के घर में शुद्धता पहुंच सके.

यह स्टार्टअप सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि दरभंगा की स्थानीय महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन गया है. मेघा और वंदना ने अपने इस छोटे से प्रयास से 30 लोगों को स्थायी रोजगार दिया है. स्थानीय महिलाएं दैनिक आधार पर पैकिंग के काम के लिए आती हैं. 30 कर्मचारी मंथली पेमेंट पर काम कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों का पालन-पोषण हो रहा है.
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मेघा और वंदना का सपना है कि उनका उत्पाद बिहार की सीमाओं को लांघकर देश के हर घर तक पहुंचे. उनका मानना है कि अगर हम अपनी जड़ों से जुड़े उत्पादों (जैसे शुद्ध सूजी) को आधुनिक रूप दें, तो हम बीमारियों को दूर भगा सकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकते हैं.

दरभंगा की ये दो सहेलियां आज उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि बिजनेस सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी किया जा सकता है.
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