पिछले 30 साल के आंकड़े बताते हैं कि निवेश के मामले में शेयर बाजार ने सोने और चांदी को पीछे छोड़ दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इक्विटी ने ज्यादातर दौर में बेहतर रिटर्न दिया, जबकि सोने ने स्थिरता और चांदी ने उतार-चढ़ाव दिखाया. निफ्टी-गोल्ड और गोल्ड-सिल्वर अनुपात भी आने वाले समय में निवेश की दिशा के अहम संकेत दे रहे हैं.
शेयर बाजार बना सबसे मजबूत वेल्थ क्रिएटर
आनंद राठी के अनुसार, इक्विटी यानी शेयर बाजार लंबे समय में संपत्ति बनाने का सबसे प्रभावी साधन रहा है. इस अवधि में निफ्टी ने औसतन 11.4 फीसदी सालाना रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी 500 का रिटर्न 11.1 फीसदी रहा. रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर बाजार ने अधिकतर मार्केट साइकल में दो अंकों का रिटर्न दिया है. 1996-2001, 2001-2006 और 2006-2011 जैसे दौर में शेयरों ने सोने और चांदी दोनों को पीछे छोड़ा.
सोना देता है स्थिरता, तेज ग्रोथ नहीं
सोने की भूमिका को रिपोर्ट में ‘सुरक्षा कवच’ बताया गया है. 1996 से 2025 के बीच सोने का औसत सालाना रिटर्न 9.4 फीसदी रहा. यह शेयरों से कम लेकिन अपेक्षाकृत स्थिर रहा. जब बाजार में गिरावट या अनिश्चितता होती है, तब सोना निवेशकों को सुरक्षा देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सोना जोखिम वाले दौर में बेहतर प्रदर्शन करता है, लेकिन यह तेजी से पैसा बढ़ाने का जरिया नहीं है.
चांदी: मौका भी, खतरा भी
चांदी को रिपोर्ट में न तो पूरी तरह सुरक्षित और न ही स्थिर एसेट माना गया है. चांदी का औसत सालाना रिटर्न 5.4 फीसदी रहा, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा रहा. आनंद राठी के अनुसार, चांदी का इक्विटी से सकारात्मक संबंध होता है, यानी जब शेयर चढ़ते हैं तब चांदी भी बढ़ती है. यही वजह है कि चांदी को ‘रिस्क-ऑन’ एसेट माना गया है, न कि मजबूत हेज.
निफ्टी-गोल्ड और गोल्ड-सिल्वर अनुपात क्या संकेत देते हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय निफ्टी-गोल्ड रेशियो अपने औसत से नीचे है, जो यह संकेत देता है कि आने वाले समय में शेयर बाजार बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. वहीं मोतीलाल ओसवाल (MOFSL) का कहना है कि हाल के महीनों में चांदी की तेज तेजी के कारण गोल्ड-सिल्वर रेशियो 127 से घटकर करीब 50 पर आ गया है. इससे संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में सोना चांदी की तुलना में बेहतर जोखिम-संतुलन दे सकता है. इसी वजह से MOFSL ने कीमती धातुओं में 75 फीसदी सोना और 25 फीसदी चांदी का निवेश अनुपात सुझाया है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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