पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है. कमजोर कॉरपोरेट नतीजों के बीच वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट ने चिंता बढ़ाई है. तेल की कीमतों में उछाल से आयात बिल और व्यापार घाटा दबाव में है. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव संभव है.
तेल महंगा, आयात बिल भारी, निवेशकों की 10 लाख करोड़ संपत्ति साफ. (Image:AI)
सेंसेक्स-निफ्टी फिसले, आईटी शेयरों में बड़ी गिरावट
पिछले 42 कारोबारी सत्रों में BSE Sensex करीब 6.5 प्रतिशत गिर चुका है. वहीं Nifty 50 भी सितंबर 2025 के बाद के निचले स्तर पर बंद हुआ. आईटी सेक्टर में कमजोरी साफ दिखी है. Infosys, TCS और HCL Technologies जैसे दिग्गज शेयर जनवरी से 11 से 30 प्रतिशत तक टूट चुके हैं. बाजार को उम्मीद थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नई कमाई आएगी, लेकिन घरेलू सॉफ्टवेयर कंपनियों में इसका असर अभी सीमित दिख रहा है.
तेल, सोना और आयात बिल ने बढ़ाई चिंता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें आठ महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. Strait of Hormuz से भारत का लगभग आधा तेल आयात होता है, ऐसे में वहां किसी भी रुकावट का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इसके अलावा सोना-चांदी की कीमतों में बीते 12 महीनों में 86 से 200 प्रतिशत तक उछाल ने व्यापार घाटा बढ़ा दिया है. बढ़ता आयात बिल और कमजोर रुपया शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माने जाते हैं.
एयरलाइंस, इंफ्रा और 800 शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर
जंग के कारण वैश्विक शिपिंग और हवाई सेवाएं प्रभावित हुई हैं. बढ़ती ईंधन कीमतों ने एविएशन सेक्टर की लागत बढ़ा दी है. वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Larsen & Toubro में भी 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, क्योंकि उसके कई प्रोजेक्ट मध्य पूर्व से जुड़े हैं. पेंट, टायर और बासमती निर्यात से जुड़ी कंपनियों समेत 800 से ज्यादा शेयर नए 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए.
हालांकि बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि हर बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी की संभावना भी बनती है. पिछले तीन दशकों में खाड़ी युद्ध और कारगिल जैसे संघर्षों के बाद बाजार ने वापसी की है. इसलिए अनुभवी निवेशक मजबूत बुनियादी कंपनियों, खासकर रक्षा और सरकारी बैंकों के शेयरों में मौके तलाश रहे हैं.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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