इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट अमोल जोशी, फाउंडर, प्लानरुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था में पीपीएफ और ईएलएसएस जैसे निवेशों से टैक्स फायदा नहीं मिलेगा. इसलिए सिर्फ टैक्स बचाने के लिए इनमें पैसा लगाना जरूरी नहीं है. हालांकि वह यह भी कहते हैं कि भविष्य के फाइनेंशियल गोल्स के लिए नियमित निवेश जारी रहना चाहिए, भले ही वह टैक्स सेविंग के दायरे से बाहर हो.
पीपीएफ अब किसके लिए सही
पीपीएफ को हमेशा सुरक्षित और सरकारी गारंटी वाला विकल्प माना गया है. इसमें निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी तीनों पर टैक्स छूट मिलती रही है. फिलहाल पीपीएफ पर करीब 7.1 प्रतिशत सालाना ब्याज मिल रहा है, जो हर तिमाही तय होता है.
टैक्स एक्सपर्ट जिग्नेश शाह, पार्टनर, डायरेक्ट टैक्स, भुटा शाह एंड कंपनी एलएलपी के अनुसार, नई टैक्स व्यवस्था चुनने पर PPF में नई जमा राशि पर 80C की छूट नहीं मिलेगी, क्योंकि यह पहले से टैक्स चुकाई हुई आय से किया गया निवेश होगा. हालांकि पुराने पीपीएफ खाते पर ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स छूट जारी रहेगी.
उनका कहना है कि अगर लंबी अवधि का सुरक्षित फंड बनाना लक्ष्य है और तुरंत लिक्विडिटी की जरूरत नहीं है, तो हर साल 1.5 लाख रुपये तक निवेश जारी रखा जा सकता है.
कंजर्वेटिव निवेशकों, रिटायरमेंट प्लानिंग करने वालों या जिनके पास पेंशन नहीं है, उनके लिए पीपीएफ अभी भी पोर्टफोलियो में स्थिरता देने वाला साधन हो सकता है.
ईएलएसएस पर क्या करें
ईएलएसएस एक इक्विटी म्यूचुअल फंड है, जिसमें तीन साल का लॉक इन पीरियड होता है. पहले इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें टैक्स बचत और वेल्थ क्रिएशन दोनों का फायदा मिलता था.
जीवन कुमार के सी, हेड ऑफ इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, पिछले तीन साल में लार्ज और मिड कैप फंड्स ने करीब 19.38 प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया, जबकि ईएलएसएस फंड्स ने करीब 17.10 प्रतिशत रिटर्न दिया. लार्ज कैप फंड्स का रिटर्न लगभग 16.12 प्रतिशत रहा.
उनका कहना है कि ईएलएसएस ने ठीक ठाक प्रदर्शन किया है और लंबी अवधि में इक्विटी बेहतर रिटर्न दे सकती है. तीन साल का लॉक इन कई बार निवेशकों को जल्दबाजी में पैसा निकालने से भी बचाता है.
जिग्नेश शाह का मानना है कि ईएलएसएस में आगे निवेश करने का फैसला पूरी तरह इस बात पर निर्भर होना चाहिए कि क्या आप लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए तैयार हैं और तीन साल का लॉक इन स्वीकार कर सकते हैं.
नई टैक्स व्यवस्था में ईएलएसएस में नया निवेश 80C छूट के लिए योग्य नहीं होगा. हालांकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 1.25 लाख रुपये तक की सालाना छूट और उसके बाद 12.5 प्रतिशत टैक्स दर अभी भी लागू है.
किसे क्या करना चाहिए
मध्यम जोखिम लेने वाले निवेशक, जिनके पास पहले से इमरजेंसी फंड है, वे ईएलएसएस में निवेश पर विचार कर सकते हैं. लेकिन अगर आपके पास शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए पर्याप्त फंड नहीं है, तो लंबे लॉक इन वाले निवेश में पैसा फंसाना जोखिम भरा हो सकता है.
टैक्स एक्सपर्ट मिहिर तन्ना, एसोसिएट डायरेक्टर, डायरेक्ट टैक्स, एसके पटोदिया एंड एसोसिएट एलएलपी का कहना है कि हर निवेशक को अलग अलग जोखिम स्तर के हिसाब से अलग बास्केट बनानी चाहिए. पहले शॉर्ट टर्म जरूरतों और इमरजेंसी फंड को सुरक्षित करें, फिर लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए योजना बनाएं.
कई फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि अगर फ्लेक्सिबिलिटी चाहिए तो बिना लॉक इन वाले डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं.
आखिर करें क्या
नई टैक्स व्यवस्था सिर्फ एक टूल है, पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं. पीपीएफ या ईएलएसएस जारी रखना या बंद करना सीधा हां या ना वाला फैसला नहीं है. यह आपके पूरे पोर्टफोलियो, जोखिम क्षमता और लक्ष्यों पर निर्भर करता है. अगर आपके पोर्टफोलियो में पहले से ईपीएफ, बॉन्ड या फिक्स्ड इनकम विकल्प ज्यादा हैं, तो पीपीएफ में और पैसा लगाना कम रिटर्न वाले साधनों में ज्यादा एकाग्रता ला सकता है. इसी तरह अगर आपके पास पहले से पर्याप्त इक्विटी फंड हैं, तो सिर्फ आदत के कारण ईएलएसएस जारी रखना जरूरी नहीं.
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