टाटा स्टील के एमडी टी वी नरेंद्रन ने स्टील कंपनियों पर कार्टेलाइजेशन के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि कंपनी सीसीआई जांच में पूरा सहयोग करेगी. उन्होंने कहा कि स्टील कीमतें वैश्विक ट्रेंड और कच्चे माल की लागत पर निर्भर करती हैं, किसी कंपनी की मिलीभगत से नहीं.
नरेंद्रन ने कहा कि स्टील की कीमतें किसी एक कंपनी या कुछ कंपनियों के फैसले से तय नहीं होतीं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय बाजार, कोकिंग कोल और आयरन ओर जैसी इनपुट लागत और ग्लोबल डिमांड सप्लाई ट्रेंड पर निर्भर करती हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय स्टील बाजार बेहद पारदर्शी है, जहां मंडी गोबिंदगढ़ और रायपुर जैसे प्रमुख केंद्रों पर रोजाना बेंचमार्क कीमतें प्रकाशित होती हैं और सैकड़ों कंपनियां सक्रिय हैं, इसलिए कीमतों में मिलीभगत के आरोपों को बाजार की संरचना के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
CCI जांच का बैकग्राउंड
सीसीआई की यह जांच 2021 में शुरू हुई थी, जब कोविड के बाद स्टील और सीमेंट की कीमतों में तेज उछाल आया था और रियल एस्टेट सेक्टर ने निर्माण लागत बढ़ने की शिकायत की थी. जनवरी 2026 में आई रिपोर्ट के मुताबिक 28 स्टील कंपनियों पर कीमतों में मिलीभगत के आरोप लगे हैं और 56 शीर्ष अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिनमें टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और सेल (SAIL) से जुड़े नाम शामिल हैं.
टाटा स्टील की डिफेंस पोजिशन
टाटा स्टील का कहना है कि कंपनी अकेले कीमतें तय नहीं कर सकती और भारतीय स्टील बाजार में कीमतें वैश्विक ट्रेंड से जुड़ी होती हैं. कंपनी ने यह भी कहा कि रोजाना सार्वजनिक रूप से कीमतें उपलब्ध होने से बाजार की पारदर्शिता साफ दिखती है और आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया के तहत जवाब दिया जाएगा.
आगे क्या
सीसीआई की जांच अभी जारी है और अंतिम आदेश से पहले कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. अगर आरोप साबित होते हैं तो कंपनियों और अधिकारियों पर भारी जुर्माना लग सकता है, जबकि अगर आरोप खारिज होते हैं तो यह भारतीय स्टील सेक्टर के लिए बड़ी राहत होगी.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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