एनएसओ के मुताबिक, शहरों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच बेरोजगारी की दर अक्टूबर-दिसंबर, 2025 की तिमाही में मामूली रूप से घटकर 6.7 फीसदी रह गई. इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 6.9 फीसदी था. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के त्रैमासिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के बीच बेरोजगारी दर अक्टूबर-दिसंबर, 2025 में घटकर 4 फीसदी रह गई. यह आंकड़ा इससे पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में 4.4 फीसदी था.
पुरुष और महिला दोनों में सुधार
सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों और महिलाओं, दोनों के बीच बेरोजगारी दर में कमी आने से यह सुधार हुआ है. शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में गिरावट मुख्य रूप से शहरी पुरुषों की बेरोजगारी दर कम होने से आई है, जो जुलाई-सितंबर, 2025 के 6.2 फीसदी से घटकर समीक्षाधीन तिमाही में 5.9 फीसदी रह गई. इससे पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी लोगों के पास काम है, जबकि शहरों में इसके मुकाबले कम अवसर मिलते हैं.
स्वरोजगार में हो रही बढ़ोतरी
आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार करने वाले व्यक्तियों का अनुपात अक्टूबर-दिसंबर, 2025 के दौरान बढ़कर 63.2 फीसदी हो गया, जो जुलाई-सितंबर तिमाही में 62.8 फीसदी था. शहरी क्षेत्रों में भी स्व-रोजगार करने वालों की हिस्सेदारी 39.3 फीसदी से बढ़कर 39.7 फीसदी हो गई. कार्यबल के वितरण के मामले में, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र का दबदबा बना रहा, जहां 58.5 फीसदी श्रमिक कार्यरत थे. शहरी क्षेत्रों में तृतीयक क्षेत्र ने अक्टूबर-दिसंबर, 2025 के दौरान 61.9 फीसदी श्रमिकों को रोजगार दिया.
देश में कितने लोग करते हैं काम
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के जनसंख्या अनुमानों के आधार पर एनएसओ के आंकड़ों ने देश में कुल श्रमिकों की संख्या भी आंकी है. जुलाई-सितंबर, 2025 के दौरान औसतन 56.2 करोड़ लोग कार्यरत थे, जो अक्टूबर-दिसंबर, 2025 में बढ़कर 57.4 करोड़ हो गए. इनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. यह आंकड़ा शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के कामकाजी लोगों को मिलाकर बनाया गया है.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.