अगर आप घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह जान लें कि बैंक केवल आपकी सैलरी स्लिप देखकर लोन नहीं देते. सैलरी से ज्यादा आपका क्रेडिट स्कोर मायने रखता है.
मान लीजिए दो लोग बैंक में होम लोन के लिए जाते हैं. दोनों की सैलरी लगभग बराबर है, बचत भी मिलती-जुलती है और नौकरी भी स्टेबल है. फिर भी एक को कम ब्याज दर पर आसानी से लोन मिल जाता है, जबकि दूसरे से ज्यादा डाउन पेमेंट मांगा जाता है या बाद में दोबारा आवेदन करने को कहा जाता है. अक्सर इसका कारण उनकी क्रेडिट हिस्ट्री होती है.
फाइनेंशियल बिहेवियर देखता है बैंक
होम लोन लंबे टेन्योर के होते हैं. बैंक को सिर्फ यह नहीं देखना होता कि आपके पास आज पैसे हैं या नहीं, बल्कि यह भी देखना होता है कि आप समय पर पैसे चुकाते रहे हैं या नहीं. पुरानी देरी, कई लोन के लिए बार-बार आवेदन करना या क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा खर्च करना बैंक के लिए चेतावनी है. ये सब बातें आपके क्रेडिट रिपोर्ट में सालों तक रहती हैं.
अच्छे क्रेडिट स्कोर से देना पड़ सकता है कम ब्याज
क्रेडिट हिस्ट्री का असर सिर्फ लोन मंजूरी पर ही नहीं, बल्कि ब्याज दर और शर्तों पर भी पड़ता है. अच्छे क्रेडिट वाले आवेदकों को बेहतर रेट, तेज प्रोसेसिंग और फ्लेक्सिबल शर्तें मिल सकती हैं. वहीं, जिनका स्कोर कमजोर है उन्हें लोन मिल सकता है, लेकिन ज्यादा ब्याज या सख्त शर्तों के साथ.
अपना क्रेडिट स्कोर कैसे सुधारें?
- समय पर भुगतान: अपनी EMI और क्रेडिट कार्ड बिल कभी भी मिस न करें.
- 30% का नियम: अपनी क्रेडिट कार्ड लिमिट का केवल 30% तक ही इस्तेमाल करने की कोशिश करें.
- पुराने खाते: अपने पुराने बैंक खातों या क्रेडिट कार्ड को बंद न करें, क्योंकि पुराना इतिहास विश्वसनीयता बढ़ाता है.
- लोन का मिक्स: सिक्योर्ड लोन (जैसे गोल्ड लोन) और अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन) का सही बैलेंस रखें.
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