अगर आपके मन में सबसे पहले ये सवाल आ रहा है कि लाइफ साइकिल फंड क्या हैं तो ये ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम हैं, जिनमें एक तय मैच्योरिटी डेट होती है. फंड का नाम ही उस साल से जुड़ा होता है, जैसे ‘लाइफ साइकिल फंड 2045’ या ‘लाइफ साइकिल फंड 2055’. मतलब, अगर आप 2045 में रिटायर होना चाहते हैं, तो आप इसी फंड में निवेश कर सकते हैं. फंड 5 साल से लेकर 30 साल तक के लिए लॉन्च किए जा सकते हैं, और हर 5 साल के अंतराल में (जैसे 10, 15, 20 साल). एक म्यूचुअल फंड कंपनी के पास ज्यादा से ज्यादा 6 ऐसे फंड एक साथ एक्टिव रह सकते हैं.
लाइफ साइकिल फंड कैसे काम करते हैं?
इनमें ‘ग्लाइड पाथ’ या पहले से तय एसेट एलोकेशन होता है. शुरू में जब मैच्योरिटी दूर होती है, तो ज्यादा पैसा इक्विटी (शेयर) में लगता है, क्योंकि लंबे समय में शेयर अच्छा रिटर्न देते हैं. जैसे-जैसे मैच्योरिटी डेट नजदीक आती है, फंड खुद-ब-खुद शेयरों का हिस्सा कम करके डेट (बॉन्ड, फिक्स्ड इनकम), गोल्ड ETF, सिल्वर ETF, InvITs जैसी सुरक्षित चीजों में शिफ्ट करता जाता है. इससे रिस्क कम होता जाता है और आपके पैसे की सुरक्षा बढ़ती है. मैच्योरिटी के करीब (1 साल बाकी रहने पर) फंड को नजदीकी मैच्योरिटी वाले दूसरे लाइफ साइकिल फंड में मर्ज कर दिया जाता है, लेकिन इसके लिए यूनिट होल्डर्स की सहमति ली जाती है.
इन फंड्स के फायदे क्या हैं?
सबसे बड़ा फायदा है ऑटोमैटिक बैलेंसिंग. निवेशक को बाजार देखकर बेचना-खरीदना नहीं पड़ता, जो ज्यादातर लोग नहीं कर पाते. ये लंबे समय के लिए डिसिप्लिन्ड निवेश को बढ़ावा देते हैं. अलग-अलग एसेट क्लास (शेयर, डेट, कमोडिटी) में निवेश होता है, जिससे रिस्क फैलता है. शुरुआती सालों में ज्यादा ग्रोथ मिल सकती है, और अंत में पैसे सुरक्षित रहते हैं. ये रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ रिस्क कम होता जाता है.
निवेश कैसे करें?
ये फंड ओपन-एंडेड हैं, यानी कभी भी खरीद-बिक्री कर सकते हैं. लेकिन लंबे समय तक रहने के लिए ग्रेडेड एग्जिट लोड है. 1 साल के अंदर निकालने पर 3%, 2 साल में 2%, 3 साल में 1%. इससे लोग जल्दी निकालने से बचते हैं. आप अपनी उम्र या लक्ष्य के साल के हिसाब से फंड चुनें, जैसे अगर 20 साल बाद रिटायरमेंट है तो 20 साल वाला फंड. SIP या लंपसम से निवेश शुरू कर सकते हैं.
इन नियमों को भी समझें
अगर निवेश का समय 5 साल से कम रह जाए, तो फंड इक्विटी आर्बिट्रेज में 50% तक जा सकता है, लेकिन कुल इक्विटी 65-75% के बीच रहनी चाहिए. ये फंड मल्टी-एसेट अलोकेशन फंड्स जैसे बेंचमार्क फॉलो करते हैं. सेबी ने ये कैटेगरी इसलिए बनाई ताकि निवेशक आसानी से गोल-बेस्ड निवेश कर सकें और अनुशासन बने रहे. अगर आप लंबे समय (5-30 साल) के लिए निवेश करना चाहते हैं और बाजार की चिंता नहीं करना चाहते, तो ये फंड बेस्ट हैं. खासकर युवा जो रिटायरमेंट या बच्चों के भविष्य के लिए बचत कर रहे हैं. लेकिन अगर आप शॉर्ट टर्म में पैसा निकालना चाहते हैं, तो इसमें निवेश न करना बेहतर रहेगा.
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