जब ईएमआई चुकाना मुश्किल हो जाता है, तब लोन सेटलमेंट आसान रास्ता लगता है. बैंक कम रकम लेकर खाता बंद करने का प्रस्ताव दे देते हैं. लेकिन सेटलमेंट करने और पूरा लोन चुकाने में बड़ा अंतर होता है. गलत फैसला आपके क्रेडिट स्कोर पर लंबे समय तक असर डाल सकता है.
पर्सनल लोन सेटलमेंट से पहले जान लें सच, वरना बिगड़ सकता क्रेडिट रिकॉर्ड. (Image:AI)
सेटलमेंट का असली मतलब क्या है?
लोन सेटलमेंट का अर्थ यह नहीं कि आपने पूरा कर्ज चुका दिया. इसका मतलब है कि बैंक ने आपसे कम रकम लेकर समझौता कर लिया. आमतौर पर यह स्थिति तब आती है जब कई ईएमआई नहीं चुकाई गई हों और खाता डिफॉल्ट में चला गया हो. आपको लग सकता है कि मामला खत्म हो गया, लेकिन बैंक के नजरिए से आपने मूल समझौते का पालन नहीं किया. यही फर्क आपके क्रेडिट रिकॉर्ड में दर्ज होता है. भविष्य में लोन लेने की कोशिश करेंगे तो यह जानकारी सामने आएगी.
क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है सीधा असर
जब लोन सेटल होता है, तो बैंक इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो जैसे TransUnion CIBIL को ‘Settled’ स्टेटस के रूप में भेजता है. यह ‘Closed’ या ‘Paid in Full’ से अलग होता है. यही एक शब्द आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकता है. सेटलमेंट के बाद स्कोर में गिरावट आ सकती है. भले आप बाद में क्रेडिट कार्ड या अन्य लोन समय पर चुकाकर स्कोर सुधार लें, लेकिन सेटलमेंट का रिकॉर्ड सात साल तक रिपोर्ट में बना रह सकता है. इस दौरान बैंक आपको लोन दें भी तो ऊंची ब्याज दर पर दे सकते हैं या आवेदन खारिज कर सकते हैं.
क्रेडिट रिपोर्ट में कैसे दिखता है रिकॉर्ड?
कई लोग मान लेते हैं कि सेटलमेंट की रकम चुकाने के बाद रिकॉर्ड साफ हो जाता है. ऐसा नहीं होता. जब भी कोई बैंक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री जांचेगा, उसे ‘Settled’ स्टेटस नजर आएगा. यह संकेत देता है कि आपने पूरा कर्ज नहीं चुकाया था. यह जानकारी अपने आप हटती नहीं है. केवल तभी स्टेटस ‘Closed’ माना जाता है जब पूरा बकाया चुकाया जाए. इसलिए सेटलमेंट करने से पहले यह समझ लें कि इसका असर लंबे समय तक रह सकता है.
कब सेटलमेंट सही विकल्प हो सकता है?
अगर आप गंभीर आर्थिक संकट में हैं और पूरा लोन चुकाने की कोई संभावना नहीं है, तो सेटलमेंट कानूनी नोटिस और बढ़ते जुर्माने से बेहतर विकल्प हो सकता है. ऐसे मामलों में यह व्यावहारिक फैसला साबित हो सकता है. लेकिन यदि आपके पास अन्य विकल्प हैं- जैसे लोन री-स्ट्रक्चरिंग, अवधि बढ़वाना या अस्थायी राहत मांगना- तो पहले उन पर विचार करें. पूरी तरह चुकाया गया लोन आपके क्रेडिट इतिहास को मजबूत बनाता है, जबकि सेटलमेंट उसे कमजोर कर सकता है. कोई भी फैसला लेने से पहले बैंक से लिखित में शर्तें लें और समझें कि खाता किस स्टेटस में रिपोर्ट होगा. आज की राहत भविष्य की परेशानी न बन जाए, इसके लिए सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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