पीजीआईएम इंडिया की स्टडी के अनुसार म्यूचुअल फंड में सिर्फ पिछले परफॉर्मेंस पर भरोसा करना गलत है, रोलिंग रिटर्न और डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान देना जरूरी है. जो फंड एक साल टॉप पर रहते हैं, वे अगले साल या दो साल में रैंक गंवा सकते हैं. उदाहरण के लिए, 2014 का टॉप फंड 2016 में 128वें और दूसरा नंबर वाला फंड 141वें स्थान पर पहुंच गया.मिडकैप फंड्स में भी यही ट्रेंड दिखा, और 2024 में टॉप और बॉटम फंड में 45% का अंतर देखा गया है.
पीजीआईएम इंडिया ने 2014 के टॉप 10 इक्विटी फंड्स का प्रदर्शन 2025 तक ट्रैक किया और देखा कि टॉप पर रहने वाले फंड बहुत जल्दी अपनी रैंकिंग खो देते हैं. मिसाल के तौर पर 2014 में नंबर वन फंड 2016 में 128वें नंबर पर पहुंच गया. दूसरे नंबर वाला फंड 141वें स्थान पर आ गया. 2018 तक ये टॉप फंड सबसे नीचे चले गए. मिडकैप कैटेगरी में भी यही हुआ. 2018 का टॉप फंड 2021 तक टॉप 10 से बाहर हो गया. 2024 में मिडकैप फंड्स में टॉप और बॉटम फंड के बीच 45 फीसदी का फर्क देखा गया.
रिटर्न की गारंटी नहीं
स्टडी में ये भी सामने आया कि तीन साल के रिटर्न भी भविष्य की गारंटी नहीं देते. 2014 से 2017 के बीच टॉप फंड्स में से सिर्फ 12.5 फीसदी ही अगले साल टॉप पर बने रहे. 2015 से 2018 के टॉप फंड्स में से महज 8.3 फीसदी 2019 में टॉप पर रहे. वजह ये है कि अलग-अलग मार्केट फेज में फंड्स की अलग-अलग स्टाइल काम करती है. जैसे वैल्यू स्टाइल अच्छे समय में कमजोर पड़ जाती है और मोमेंटम स्टाइल मजबूत हो जाती है. इसलिए लीडरबोर्ड जल्दी बदलता रहता है.
रोलिंग रिटर्न क्या है?
ये वो रिटर्न हैं जो लंबे समय के औसत को दिखाते हैं. रोज या हर महीने के हिसाब से कैलकुलेट होते हैं, न कि सिर्फ एक खास तारीख से. जैसे 5 साल या 10 साल के रोलिंग रिटर्न देखें तो पता चलता है कि फंड हर स्थिति में कैसा रहा. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, मॉर्निंगस्टार इंडिया के एक्सपर्ट कौस्तुभ बेलपुरकर कहते हैं कि SIP के लिए या लंबे मार्केट साइकिल देखने के लिए रोलिंग रिटर्न सबसे अच्छा तरीका है. ऑनलाइन फ्री कैलकुलेटर से आसानी से चेक कर सकते हैं.
डायवर्सिफिकेशन है जरूर
स्टडी का मुख्य संदेश ये है कि मजबूत रिटर्न फंड की अच्छी प्रोसेस और टीम से आते हैं, न कि सिर्फ हालिया नंबर से. निवेशकों को शार्प रेशियो और सोर्टिनो रेशियो जैसे जोखिम मापदंड देखने चाहिए. फंड मैनेजर का निवेश दर्शन समझना चाहिए. सिर्फ लीडरबोर्ड चेज न करें. अलग-अलग कैटेगरी और स्टाइल में डायवर्सिफाई करें. नए फंड में तभी जाएं जब वो आपके पोर्टफोलियो में कुछ नया जोड़े. लंबे ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंड पर भरोसा करें. SIP से निवेश करें और लंबी अवधि देखें.
ये स्टडी निवेशकों को आंख खोलने वाली है. आजकल लोग जल्दी रिटर्न देखकर फंड बदलते रहते हैं, लेकिन इससे नुकसान होता है. पीजीआईएम इंडिया की ये रिसर्च बताती है कि धैर्य और सही तरीके से देखना जरूरी है. अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश सोच रहे हैं तो रोलिंग रिटर्न पर फोकस करें, हालिया परफॉर्मेंस पर नहीं. इससे बेहतर फैसला ले पाएंगे और लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिल सकता है.
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