रिपोर्ट बताती है कि 2025 में आईपीओ से औसत रिटर्न पिछले साल के मुकाबले 68 फीसदी कम हो गया. अगर किसी निवेशक ने 2025 के सभी बड़े आईपीओ में एक-एक लॉट लिया होता तो औसत मुनाफा सिर्फ 9.55 फीसदी मिलता, जबकि उसी समय निफ्टी 50 ने 10.5 फीसदी रिटर्न दिया. मतलब आईपीओ से बाजार के मुकाबले कम कमाई हुई. कंपनियां आईपीओ की कीमत बहुत ऊंची रख रही हैं, जिससे बड़े निवेशक जैसे एंजेल और वेंचर कैपिटल वाले आसानी से मुनाफा कमा लेते हैं, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए लिस्टिंग पर ज्यादा गेन नहीं बचता. ओवरसब्सक्रिप्शन इतना ज्यादा होता है कि आवंटन लॉटरी जैसा हो जाता है, ज्यादातर को सिर्फ एक लॉट मिलता है.
रिटेल निवेशकों के लिए कई खतरे
अनुभवी निवेशक गोपाल शर्मा कहते हैं कि कम से कम 7 में से 10 आईपीओ से दूर रहना चाहिए. कई आईपीओ लिस्टिंग पर ही घाटे में चले जाते हैं. मिसाल के तौर पर 2021 का पेटीएम आईपीओ पहले दिन 27 फीसदी नीचे आ गया. 2008 का रिलायंस पावर आईपीओ भी 17 फीसदी गिरा. छोटे मुनाफे से भी फर्क नहीं पड़ता, जैसे 15 हजार रुपये लगाकर अगर दोगुना हो जाए तो सिर्फ 15 हजार का फायदा, जो जिंदगी बदलने वाला नहीं होता.
एसईबीआई की स्टडी में सामने आई ये बात
एसईबीआई की स्टडी कहती है कि 23 फीसदी निवेशक घाटे वाले शेयर बेचते नहीं, उम्मीद करते रहते हैं कि ठीक हो जाएगा, लेकिन ज्यादातर समय नुकसान और बढ़ जाता है. एफओएमओ यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट की वजह से लोग बिना सोचे आईपीओ में कूद पड़ते हैं, लेकिन एक्सपर्ट कृष्णा रथ कहते हैं कि इससे बचना चाहिए. चेन्नई के सेकर मारुदा गौंडर जैसे निवेशक अब आईपीओ छोड़कर स्थापित कंपनियों के शेयर खरीद रहे हैं, क्योंकि वहां रिटर्न बेहतर मिल रहे हैं. बाजार की वैल्यूएशन ऊंची है, जिससे आईपीओ में मुनाफा कम हो रहा है.
निवेशकों को सलाह है कि आईपीओ में अंधाधुंध न जाएं. अगर लिस्टिंग पर अच्छा मुनाफा दिखे तो तुरंत बेच दें, जैसे एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में कई लोग बाद में गिरावट में फंस गए. लंबे समय के लिए सोचकर निवेश करें. साथ ही, सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें. ये रिपोर्ट सिर्फ जानकारी के लिए है, निवेश का फैसला आपका अपना होता है. 2026 में आईपीओ की बाढ़ आएगी, लेकिन सावधानी से ही फायदा होगा, नहीं तो पैसा डूब सकता है.
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