लोग ऐसा क्यों करते हैं?
जब कैश फ्लो की समस्या होती है, तब क्रेडिट कार्ड एक अस्थायी राहत जैसा लगता है. EMI बाउंस होने से बच जाते हैं. क्रेडिट स्कोर पर तुरंत असर नहीं पड़ता है. कुछ हफ्तों का समय मिल जाता है. अगर आप क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल समय पर चुका देते हैं, तो ब्याज से बच सकते हैं. इस स्थिति में यह सिर्फ एक छोटा-सा अस्थायी उपाय हो सकता है.
लेकिन असली खतरा कहां है?
क्रेडिट कार्ड का ब्याज बहुत ज्यादा होता है. जहां पर्सनल लोन पर 11-14% सालाना ब्याज लगता है. वहीं क्रेडिट कार्ड पर 30-45% तक ब्याज लग सकता है. अगर आपने कैश एडवांस लिया है तो ब्याज पहले दिन से ही शुरू हो जाता है, साथ में विड्रॉल चार्ज भी लगता है. थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म भी 2% या उससे ज्यादा कन्वीनियंस फीस ले सकते हैं. देखने में यह छोटा लगता है, लेकिन बार-बार करने पर रकम बढ़ जाती है.
क्रेडिट स्कोर पर भी असर
अगर आपके कार्ड की लिमिट 1 लाख रुपये है और आपने 60,000 रुपये खर्च कर दिए, तो आपकी क्रेडिट उपयोग दर 60% हो जाती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट का 30-40% से ज्यादा इस्तेमाल आपके क्रेडिट स्कोर पर निगेटिव असर डाल सकता है.
कब यह तरीका सही हो सकता है?
अगर यह सिर्फ टाइमिंग की समस्या है और आप पूरा कार्ड बिल समय पर चुका सकते हैं. अगर EMI बाउंस होने पर भारी पेनल्टी लगती हो और आपके पास तुरंत दूसरा ऑप्शन न हो तो यह तरीका हो सकता है. लेकिन इसे रेगुलर आदत बनाना खतरनाक हो सकता है.
बेहतर विकल्प क्या हैं?
अपने बैंक से बात करें, EMI की तारीख सैलरी के अनुसार बदलवा सकते हैं. जरूरत हो तो लोन रिस्ट्रक्चरिंग का ऑप्शन पूछें. इमरजेंसी फंड हो तो उसका इस्तेमाल करें. कम रिटर्न वाले निवेश को बेच देना कई बार महंगे कर्ज लेने से बेहतर होता है.
आखिरी ऑप्शन के तौर पर करें इस्तेमाल
क्रेडिट कार्ड से EMI भरना कर्ज खत्म नहीं करता, बस उसे एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करता है. अगर तुरंत चुका दिया तो यह अस्थायी राहत है. अगर नहीं चुकाया, तो यह महंगा कर्ज बन सकता है. एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेना आसान लगता है, लेकिन लंबे समय में यह फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ा सकता है. समझदारी इसी में है कि इसे आखिरी ऑप्शन के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाए.
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