यह सब सितंबर 2023 में शुरू हुआ जब दंपति ने गुड़गांव के सेक्टर 15 में 32nd एवेन्यू प्रोजेक्ट की पहली मंजिल की यूनिट 64 लाख रुपये में खरीदी. डेवलपर ने उन्हें बताया कि यह 3.95 एकड़ जमीन का जॉइंट ओनरशिप वाला प्रोजेक्ट है. वादा किया गया कि 30 साल की लीज होगी, हर महीने फिक्स्ड किराया मिलेगा, हर तीन साल में 10 फीसदी बढ़ोतरी होगी और प्रॉपर्टी की वैल्यू भी तेजी से बढ़ेगी. डॉक्यूमेंट्स में कन्वेयेंस डीड, अलॉटमेंट लेटर, लीज़िंग राइट्स एग्रीमेंट और लीज़ डीड सब शामिल थे. शुरुआत के एक-दो साल तक किराया समय पर आता रहा, दंपति खुश थे कि निवेश सही साबित हो रहा है, लेकिन अचानक पेमेंट रुक गए. फिर फोन भी उठना बंद कर दिया, मैसेज का भी कोई जवाब नहीं, और जब वे खुद प्रॉपर्टी देखने गए तो चौंक गए.
फर्जी बोर्ड लगाकर निवेशकों को लुभाया गया
साइट पर लगे साइनबोर्ड बड़े ब्रांड्स के नाम से थे, जिसमें लॉन्ग-टर्म लीज़ दिखा नजर आ रहा था, लेकिन जांच करने पर पता चला कि ये सिर्फ 11 महीने के छोटे अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट थे. फर्जी बोर्ड लगाकर निवेशकों को लुभाया गया था. टीडीएस काटकर 16ए फॉर्म दिए गए लेकिन वो जमा ही नहीं किए गए. इससे साफ जाहिर होता है कि मंशा गलत थी. दंपति को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और मानसिक तनाव भी बहुत बढ़ गया. उन्होंने दिल्ली के सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में दिसंबर में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें कंपनी के सीईओ ध्रुव शर्मा, उनकी बहन, माता-पिता और अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, विश्वासघात, फर्जी मामले और साजिश के आरोप लगाए गए. गुड़गांव पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग इसकी जांच कर रही है.
कई लोगों के साथ हुए हैं ऐसे फ्रॉड
यह मामला अकेला नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट में कई अन्य निवेशक भी पिछले साल सितंबर से किराया न मिलने की शिकायत कर रहे हैं. पिछले हफ्ते से प्रोटेस्ट भी शुरू हो गए हैं. कंपनी की तरफ से कहा गया है कि कुछ जगहों पर टेनेंट चेंज की वजह से थोड़ी देरी हुई है, जो सामान्य है. रिप्लेसमेंट लीज़िंग पर काम चल रहा है और निवेशकों की सिक्योरिटी का ध्यान रखा जा रहा है. कंपनी का दावा है कि वह दशकों से अच्छा परफॉर्मेंस दे रही है लेकिन कुछ स्पेस में साइक्लिकल वैकेंसी से नाम खराब हो रहा है.
यह पूरी घटना कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ा सबक है. बड़े-बड़े वादे और चमकदार बोर्ड देखकर जल्दबाजी न करें. प्रोजेक्ट की पूरी जांच करें, रजिस्टर्ड लीज़ एग्रीमेंट देखें, टेनेंट की डिटेल्स चेक करें और लीगल एडवाइजर से सलाह लें. कई बार ऐसे स्कीम में लोग अपनी सारी बचत लगा देते हैं और बाद में पैसे अटक जाते हैं. अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है, वरना एक निवेश आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा धोखा बन सकता है.
कैसे रहे प्रॉपर्टी फ्रॉड्स से दूर?
- कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करते समय सबसे पहले हमेशा प्रोजेक्ट की पूरी जांच-पड़ताल करें. डेवलपर की कंपनी की पुरानी प्रोजेक्ट्स देखें, उनके पिछले काम का रिकॉर्ड चेक करें.
- इस बात का भी ध्यान रखें कि रजिस्टर्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट होना चाहिए जोकि RERA पोर्टल पर होना जरूरी है.
- अगर प्रोजेक्ट RERA रजिस्टर्ड नहीं है तो उससे दूर रहें.
- साइनबोर्ड या ब्रोशर पर दिखाए गए बड़े ब्रांड्स के नाम पर भरोसा न करें, बल्कि खुद उन ब्रांड्स से संपर्क करके कन्फर्म करें कि क्या वे सच में लॉन्ग-टर्म लीज़ में हैं या नहीं. कई बार फर्जी बोर्ड लगाकर सिर्फ निवेशकों को लुभाया जाता है.
- दूसरा, सभी डॉक्यूमेंट्स अच्छे से पढ़ें और लीगल एडवाइजर या वकील से जरूर चेक करवाएं.
- कन्वेयेंस डीड, अलॉटमेंट लेटर, लीज़ एग्रीमेंट और रजिस्टर्ड लीज़ डीड सब कुछ देखें.
- अगर लीज़ सिर्फ 11 महीने की अनरजिस्टर्ड है तो समझ लें कि यह रिस्की है.
- किराए का वादा बहुत ज्यादा हो तो सावधान रहें क्योंकि रियल में इतना रिटर्न मिलना मुश्किल होता है.
- पेमेंट हमेशा कंपनी के ऑफिशियल अकाउंट में करें, चेक या ऑनलाइन ट्रांसफर से, कैश कभी न दें.
- निवेश करने से पहले साइट विजिट कई बार करें, आसपास के लोगों से बात करें और अगर किराया मिलना शुरू हो जाए तो पहले कुछ महीने देखें कि पेमेंट नियमित आ रहा है या नहीं.
- अगर कोई दिक्कत लगे तो तुरंत पुलिस या कंज्यूमर फोरम में शिकायत करें. थोड़ी सावधानी और रिसर्च से आप अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकते हैं और ऐसे फ्रॉड से दूर रह सकते हैं.
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