दुनिया भर में जहां घरों की कीमतों में औसत बढ़ोतरी की रफ्तार काफी धीमी रही, वहीं भारत में यह तेजी बेहद मजबूत रही. इस प्रदर्शन में दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा योगदान रहा है. यहां बीते एक साल में घरों की कीमतों में करीब 19 फीसदी का उछाल आया, जो देश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में कहीं ज्यादा है.
दिल्ली-एनसीआर में घरों की मांग बरकरार
दिल्ली-एनसीआर में घरों की मांग लगातार बनी हुई है. खासकर बड़े और प्रीमियम घरों की डिमांड तेज बनी हुई है. बेहतर सड़क नेटवर्क, मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और रोजगार के भरपूर अवसरों की वजह से लोग इस क्षेत्र में बसना पसंद कर रहे हैं. गुरुग्राम, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे इलाकों में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है.
रिशभ पेरिवाल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने कहा, “भारत का आवासीय रियल एस्टेट बाजार लगातार मजबूत गति दिखा रहा है. नाइट फ्रैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, घरों की कीमतों में सालाना 9.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कई वैश्विक बाजारों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन है. इस तेजी के पीछे घरेलू मांग की मजबूती, आसान फाइनेंस विकल्प और स्थिर आर्थिक माहौल प्रमुख कारण हैं. दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी बाजार इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं, जहां लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो रहा है और लोगों की आय में भी सुधार देखने को मिल रहा है. खासकर लग्जरी और प्रीमियम घरों की मांग बेहद मजबूत है. गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, साउदर्न पेरिफेरल रोड और न्यू गुरुग्राम जैसे इलाकों में हाई-नेट-वर्थ खरीदारों की खास दिलचस्पी देखने को मिल रही है.”
8 शहरों में 3.48 लाख घरों की बिक्री
देश के टॉप 8 शहरों में 2025 के दौरान कुल 3.48 लाख से अधिक घरों की बिक्री हुई. यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों की तुलना में काफी मजबूत माना जा रहा है. खासकर साल के दूसरे हिस्से यानी जुलाई से दिसंबर के बीच बिक्री सबसे ज्यादा रही, जो 2013 के बाद का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा.
अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो हैदराबाद में घरों की कीमतों में 13 फीसदी, बेंगलुरु में 12 फीसदी और मुंबई में 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसका मतलब है कि देश के लगभग सभी बड़े शहरों में घर महंगे हुए और खरीदारों का भरोसा बना रहा.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अब खरीदार 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं. ऐसे घरों की बिक्री कुल बिक्री का लगभग आधा हिस्सा बन चुकी है. लोग अब सस्ते घरों की बजाय बेहतर क्वालिटी, समय पर डिलीवरी और मजबूत फाइनेंस विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
रजत बोकोलिया, सीईओ, न्यूस्टोन ने कहा, “नाइट फ्रैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया के टॉप 10 आवासीय बाजारों में शामिल हो गया है, जहां सालाना 9.6 फीसदी की कीमत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि दिल्ली-एनसीआर में यह बढ़त 19 फीसदी तक पहुंच गई है. इससे घर खरीदने वालों का भरोसा और मजबूत होगा और निवेश गतिविधियां भी बढ़ेंगी. मुख्य इलाकों में तेजी से बढ़ती कीमतों के चलते अब खरीदार टियर-2 शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, जैसे सोनीपत. यहां उन्हें अपेक्षाकृत सस्ते और बेहतर विकल्प मिल रहे हैं, साथ ही आरआरटीएस और केएमपी एक्सप्रेसवे जैसी मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. इसी वजह से सोनीपत में आवासीय मांग तेजी से बढ़ रही है और यह दिल्ली-एनसीआर का नया हॉटस्पॉट बनता नजर आ रहा है.”
खरीदारों को बेहतर सुविधाएं और डिलीवरी पर ध्यान
डेवलपर्स ने भी इस दौरान नई लॉन्चिंग की बजाय पुराने प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दिया. उनका फोकस खरीदारों को बेहतर सुविधाएं और भरोसेमंद डिलीवरी देने पर रहा.
सुदीप भट्ट, डायरेक्टर – स्ट्रैटेजी, व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन ने कहा, “भारत के आवासीय रियल एस्टेट बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया है और अब यह दुनिया के टॉप 10 सबसे मजबूत बाजारों में अपनी जगह बना चुका है. नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में सामने आया 9.6 फीसदी की सालाना कीमत बढ़ोतरी का आंकड़ा बताता है कि यह तेजी पूरी तरह से वास्तविक खरीदारों की मांग पर आधारित है. स्थिर आर्थिक माहौल और लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति ने इस चक्र को और मजबूती दी है. एनसीआर जैसे बाजारों ने राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां घरों की कीमतों में लगभग 19 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि एक परिपक्व होते बाजार की तस्वीर है, जहां वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद मांग बनी हुई है. खासकर प्रीमियम सेगमेंट इस पूरे चक्र का नेतृत्व कर रहा है. अब 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घर कुल बिक्री का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुके हैं.
इसके साथ ही ब्रांडेड रेजिडेंसेज में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है, जहां ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी मानकों को घरेलू मालिकाना हक के साथ जोड़ा जा रहा है. इससे प्रीमियम लिविंग के नए मानक स्थापित हो रहे हैं. कुल मिलाकर यह रुझान 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक सकारात्मक और स्वस्थ भविष्य की ओर इशारा करता है.”
क्या कहती है नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट
नाइट फ्रैंक की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब मजबूत नींव पर खड़ा है. दिल्ली-एनसीआर की शानदार परफॉर्मेंस और देशभर में बनी मजबूत मांग को देखते हुए 2026 और उसके बाद भी इस सेक्टर में अच्छी बढ़त जारी रहने की उम्मीद है.
यह उपलब्धि भारतीय रियल एस्टेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है, जो दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत अब सिर्फ तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी मार्केट में भी ग्लोबल लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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