उत्तर पश्चिम रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए चार दिन का सघन चेकिंग अभियान चलाया. यह अभियान 19 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक चला. अभियान का उद्देश्य ट्रेनों में अवैध और खतरनाक सामान ले जाने वालों को पकड़ना था.
कई बार यात्री अंजाने में गलती कर बैठते हैं.
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि वाणिज्य विभाग, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मिलकर यह काम किया. उन्होंने विभिन्न स्टेशनों पर कुल 481 ट्रेनों की गहन जांच की. जांच में यात्रियों, रेलकर्मचारियों और ठेके पर काम करने वाले लोगों की भी तलाशी ली गई.
इस चार दिवसीय अभियान में कुल 9 लोग प्रतिबंधित सामग्री के साथ पकड़े गए. इनमें पटाखे, पेट्रोलियम पदार्थ, गैस सिलेंडर, केरोसिन, सूखी झाड़ियां, नशीले पदार्थ जैसी चीजें शामिल थीं. पकड़े गए लोगों के खिलाफ आरपीएफ या जीआरपी ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.रेलवे नियमों के मुताबिक ट्रेन में ऐसी खतरनाक चीजें ले जाना अपराध है.
रेलवे एक्ट के तहत दोषी को 1,000 रुपये तक जुर्माना, तीन साल तक की कैद या दोनों सजाएं हो सकती हैं. ये सामग्रियां आग, विस्फोट या अन्य हादसों का कारण बन सकती हैं, जिससे सभी यात्रियों की जान को खतरा होता है.
रेलवे ने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी.यात्रियों से अपील है कि अगर ट्रेन या स्टेशन पर कोई संदिग्ध व्यक्ति, बैग या सामान दिखे तो तुरंत टीटीई, आरपीएफ जवान को सूचित करें. आप रेलवन ऐप डाउनलोड करके शिकायत दर्ज कर सकते हैं या 139 नंबर पर कॉल कर सकते हैं. यात्रियों का सहयोग रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने में बहुत महत्वपूर्ण है. रेलवे लगातार यात्रियों को जागरूक करता है और अपराधियों पर नजर रखता है ताकि सभी शांति से सफर कर सकें.
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