उत्तर रेलवे के जीएम अशोक कुमार वर्मा की जगह राजेश कुमार पांडेय को बनाया गया है. उन्होंने बुधवार को पदभार संभाल लिया है. वहीं, अशोक कुमार वर्मा दूसरी जगह पोस्टिंग दी गयी है. सवाल उठता है कि उन्हें इस पद की जिम्मेदारी क्यों दी गयी. उनकी क्या उपलब्धि रही है. जिस आधार यह फैसला लिया गया.
कवच तकनीक को इजाद करने में भी रही है खास भूमिका.
भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, ‘कवच’ के डेवलप और इस्तेमाल कराने में पांडेय की भूमिका प्रमुख रहे हैं. हाल ही में, रेलवे बोर्ड में अपर सदस्य (सिग्नल) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने 400 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर ‘कवच’ की इंस्टाल करवाया है, जिससे रेल सुरक्षा और भी बेहतर हुई है. डीआरएम के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
आरडीएसओ में निरीक्षण निदेशक के रूप में तैनाती रही है. जहां उन्होंने गुणवत्ता आश्वासन प्रोटोकॉल में सुधार किया.पूर्व मध्य रेलवे में समस्तीपुर मंडल में अपर मंडल रेल प्रबंधक और पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल में मंडल रेल प्रबंधक के रूप में काम किया है.पश्चिम रेलवे में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर कार्य किया, विशेष रूप से मुंबई उपनगरीय खंड में ‘एक्सल काउंटर’ की स्थापना का नेतृत्व उन्होंने किया ताकि मानसून के दौरान ट्रेन प्रभावित न हों. उनके इस कदम से बुनियादी ढांचे का तेजी से और गुणवत्ता के साथ विकास हुआ है. इसके साथ ही यात्रियों और कर्मचारियों की संतुष्टि भी बेहतर हुई है.
भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग सेवा के 1989 बैच के वरिष्ठ अधिकारी राजेश कुमार पांडे ने अपनी पढ़ाई मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स में बी.ई. और आईआईटी दिल्ली से एम.टेक करके पूरी की. उन्होंने रेलवे में करियर की शुरुआत बरौनी में सहायक सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर के रूप में की. इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. आरडीएसओ में निरीक्षण निदेशक रहते हुए उन्होंने सिग्नल उपकरणों की गुणवत्ता में सुधार किया.
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