बुधवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,122.66 अंक यानी 1.40 फीसदी टूटकर 79,116.19 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 1,795.65 अंक या 2.23 फीसदी तक गोता लगाकर 78,443.20 अंक पर आ गया था. 28 फरवरी से शुरू हुए भू-राजनीतिक संकट के बीच पिछले शुक्रवार से अब तक सेंसेक्स कुल 2,171 अंक या 2.67 फीसदी गिर चुका है. इस गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले शुक्रवार से अब तक 16,32,428.12 करोड़ रुपये घटकर 4,47,18,243.15 करोड़ रुपये रह गया है.
डगमगा रहा निवेशकों का भरोसा
रेलिगेयर ब्रोकिंग के शोध विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा कि वैश्विक संकेतों और निरंतर बनी भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण बाजार में नकारात्मक रुझान रहा. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है. विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली और मुद्रा में उतार-चढ़ाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है. वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड भी 1.63 फीसदी की बढ़त के साथ 82.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.
इन शेयरों ने कराया ज्यादा नुकसान
बाजार में गिरावट से सेंसेक्स के शेयरों में टाटा स्टील में सर्वाधिक 6.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो (4.53 फीसदी), बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एनटीपीसी, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व और हिंदुस्तान यूनिलीवर भी घाटे में रहे. दूसरी ओर, भारती एयरटेल, इंफोसिस और टेक महिंद्रा के शेयरों में लाभ रहा. क्षेत्रीय सूचकांकों में धातु क्षेत्र में 4 फीसदी की भारी गिरावट आई. इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, औद्योगिक, रियल्टी, कमोडिटी और ऊर्जा क्षेत्रों में भी 2 से 3.50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई.
कितनी कंपनियों में दिखी गिरावट
बीएसई पर कुल 3,245 शेयरों के भाव गिरे, जबकि 1,053 शेयरों में तेजी रही और 135 शेयर अपरिवर्तित रहे. एशियाई बाजारों में भी गहरा नुकसान देखा गया. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 12 फीसदी तक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे. हालांकि, गुरुवार सुबह भारत सहित तमाम एशियाई बाजारों में भी तेजी दिख रही है और बीएसई पर भी कुछ हद तक रिकवरी हुई है.
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