IT Stocks Crash : इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी शेयरों की पिछले कुछ दिनों से लंका लगी हुई है. एंथ्रोपिक के एआई टूल्स की लॉन्चिंग के बाद से ही टेक इंडस्ट्री में हलचल है और इसी ने टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल जैसी कंपनियों के शेयरों के हाथ खड़े करवा दिए हैं. फरवरी में अब तक आईटी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 50 अरब डॉलर घट चुका है.
निवेशकों को डर है कि यह नई तकनीक भारत के 283 अरब डॉलर के आईटी सर्विस इंडस्ट्री के लिए बड़ा खतरा है.
पिछले महीने टेक स्टार्टअप Anthropic ने अपना एक एआई टूल लॉन्च किया था. इसकी लॉन्चिंग ने वैश्विक टेक जगत में खलबली मचा दी. शेयर बाजार में आई मंदी की सुनामी के पीछे भी इसी का हाथ माना जा रहा है. निवेशकों को डर है कि यह नई तकनीक भारत के 283 अरब डॉलर के आईटी सर्विस इंडस्ट्री के लिए बड़ा खतरा है. यह कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को ध्वस्त कर सकता है. विश्लेषकों का मानना है कि जेनरेटिव एआई का तेजी से बढ़ता यूज कोडिंग और टेस्टिंग जैसे बुनियादी कार्यों को ऑटोमेट कर देगा.
मार्केट लीडर्स पस्त
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बाजार के दिग्गजों पर सबसे ज्यादा गाज गिरी. इंडस्ट्री लीडर टाटा कंसल्टेंसी (TCS) के शेयर 2.1% तक टूट गए, जबकि इंफोसिस (Infosys) में 1.2% और एचसीएलटेक में 1.4% की गिरावट दर्ज की गई. एक समय इंडेक्स 5.2% तक नीचे चला गया था, लेकिन सत्र के अंतिम घंटों में हुई हल्की रिकवरी ने गिरावट के घावों को भरने की थोड़ी कोशिश की.
जेपी मॉर्गन की चेतावनी
दिग्गज वित्तीय संस्थान JP Morgan के विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल क्लाइंट्स अब अपने आईटी बजट का पुनर्वितरण (Redistribution) कर सकते हैं. ग्राहकों का ध्यान अब पारंपरिक सॉफ्टवेयर सर्विसेज से हटकर एआई-आधारित समाधानों की ओर जा रहा है, जिससे भारतीय कंपनियों के विकास लक्ष्यों पर पानी फिर सकता है.
हेंडरसन फार ईस्ट इनकम के पोर्टफोलियो मैनेजर सैट दुहरा का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियां यह स्पष्ट करने में विफल रही हैं कि वे एआई को एक खतरे के बजाय अवसर में कैसे बदलेंगी. उनके अनुसार, स्पष्ट स्ट्रैटेजी और रोडमैप की कमी के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया है.
क्या गिरावट में खरीदारी का सही मौका है?
सेंटरम ब्रोकिंग के पियूष पांडे के मुताबिक, शुक्रवार को दोपहर के बाद आई रिकवरी की मुख्य वजह “डिप में खरीदारी” (Buying the dip) करना था. कई निवेशकों को इस भारी गिरावट के बाद शेयरों की वैल्यूएशन आकर्षक लगने लगी है. कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बाजार ने एआई से पैदा हुए खतरों पर जरूरत से ज्यादा और बहुत जल्द प्रतिक्रिया (Overreaction) दे दी है.
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