आज 11 मार्च को शेयर बाजार में वायर और केबल कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. बीएसई पर Polycab India, KEI Industries और Finolex Cables समेत कई कंपनियों के शेयर 4–5% तक गिरकर बंद हुए. इसकी वजह कॉपर की कीमतों में तेजी रही है. चीन में मजबूत आर्थिक आंकड़ों से कॉपर की मांग बढ़ने के कारण London Metal Exchange और Multi Commodity Exchange of India पर कॉपर की कीमतें चढ़ गईं, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ने और मुनाफे पर दबाव की आशंका से निवेशकों ने इन शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी.
कॉपर की कीमत बढ़ने से वायर और केबल कंपनियों के शेयर्स लुढ़के. (एआई फोटो)
यह गिरावट पिछले कुछ दिनों में आई है. चीन दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर इस्तेमाल करने वाला देश है. हाल ही में चीन से अच्छे आर्थिक आंकड़े आए, जैसे फैक्ट्री उत्पादन और निर्माण में बढ़ोतरी. इससे कॉपर की मांग बढ़ी और कीमतें चढ़ गईं. लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर की कीमत ऊपर गई और भारत में MCX पर कॉपर की कीमत 1200 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई. कॉपर की कीमत बढ़ने से तार-केबल कंपनियों की लागत (कॉस्ट) बढ़ जाती है. पॉलीकैब में कॉपर कुल कच्चे माल का 50-60% हिस्सा होता है. अगर कॉपर महंगा होता है तो कंपनी या तो कीमत बढ़ाती है या मुनाफा कम होता है. आपको बता दें कि पिछले 1 साल में कॉपर की कीमतें 15.2 फीसदी बढ़ गई है. इसी वजह से निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयर्स बेचना शुरू कर दिए.
कंपनियों पर क्या असर पड़ता है?
पॉलीकैब, केईआई और भारत की अन्य बड़ी वायर और केबल कंपनियां घरेलू बिजली, निर्माण, रियल एस्टेट और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले तार बनाती हैं. कॉपर महंगा होने से इनकी मार्जिन (मुनाफे का प्रतिशत) पर दबाव पड़ता है. अगर मांग कम हुई या कीमतें नहीं बढ़ा पाईं तो नुकसान हो सकता है. कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि कॉपर की कमी अगले 15 साल तक रह सकती है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रहेंगी. हालांकि, ये कंपनियां मजबूत हैं और पिछले सालों में इनके शेयर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं. लेकिन कमोडिटी (कच्चे माल) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से शेयरों में भी उतार-चढ़ाव आता रहता है.
सीएनबीसी के एनालिस्ट के अनुसार, गौरांग शाह ने बताया कि केबल और वायर का शेयर मार्केट में बहुत बड़ा है. इसमें कई सारी नई कंपनियां आती रहेंगी जो मिलकर काम करेंगी, इसमें किसी एक या दो लिस्टेड कंपनी को फायदा या नुकसान नहीं होगा. साथ ही, ऐसे में कामकाज और कंपनियों पर नेगेटिव असर होना थोड़ा मुशिकल है. दूसरी बड़ी बात ये है कि सप्लाई को लेकर जो मुश्किल है, वो इन्वेन्ट्री पर डिपेंड करती है और भाव अगर बढ़ते हैं तो आखिर में उपभोक्ताओं को ही हर्जाना भरना पड़ता है जोकि सामान के भाव की बढ़त के रूप में होता है. उन्होंने Havells India, Finolex Cables, Polycab, KEI Industries पर खरीदारी की राय भी दी है. साथ ही ये भी कहा है कि मार्जिन पर दबाव आता है तो उपभोक्ता को ही वह उठाना पड़ेगा.
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