कृषि और डेयरी पर भारत की ‘रेड लाइन’ पूरी तरह सुरक्षित
ईयू के ट्रेड और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच ने कहा कि भारत और ईयू के बीच एफटीए में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रेड लाइन का पूरा सम्मान किया गया है. उन्होंने साफ किया कि इन क्षेत्रों में किसी भी तरह का पूर्ण शुल्क मुक्त व्यापार नहीं होगा. जहां जरूरत होगी, वहां कोटा और आंशिक शुल्क कटौती जैसे प्रावधान किए गए हैं, ताकि घरेलू किसानों और दुग्ध उत्पादकों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.
97 से 99 फीसदी सेक्टरों में टैरिफ लिबरलाइजेशन की योजना
सेफकोविच के मुताबिक यह समझौता बेहद संतुलित तरीके से तैयार किया गया है. एफटीए के तहत 97 से 99 प्रतिशत सेक्टरों में टैरिफ लिबरलाइजेशन किया जाएगा, लेकिन सभी उत्पादों पर समान रूप से शुल्क में कटौती नहीं होगी. कुछ उत्पादों पर सीमित मात्रा में आयात की अनुमति होगी, जबकि कुछ सेक्टरों में चरणबद्ध तरीके से शुल्क घटाया जाएगा.
नौकरियों, निवेश और व्यापार में होगा बड़ा इजाफा
ईयू ट्रेड कमिश्नर ने दावा किया कि इस समझौते से भारत में यूरोपीय कंपनियों द्वारा किया जाने वाला निवेश और रोजगार सृजन मौजूदा स्तर से दोगुना हो सकता है. दोनों पक्षों का लक्ष्य है कि मौजूदा 180 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को आने वाले वर्षों में दोगुना किया जाए. एफटीए लागू होने के बाद यूरोपीय कंपनियों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की कस्टम ड्यूटी की बचत होने का अनुमान है.
ऑटो, आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगा लाभ
समझौते से ऑटोमोबाइल, आईटी सर्विसेज, फार्मास्युटिकल्स, वाइन और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. ईयू ने भारत की मजबूत आईटी टैलेंट और फार्मा क्षमता की सराहना की है. टेक्सटाइल जैसे श्रम आधारित सेक्टरों के लिए यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच दी जाएगी, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना है.
ऑटोमोबाइल और वाइन पर संवेदनशील संतुलन
ऑटो सेक्टर को लेकर दोनों पक्षों के बीच संरचनात्मक अंतर को ध्यान में रखते हुए समझौता किया गया है. यूरोप का कार बाजार भारत से लगभग ढाई गुना बड़ा है. ऐसे में ऑटोमोबाइल्स पर कोटा और चरणबद्ध टैरिफ कटौती का विकल्प अपनाया जाएगा. वाइन और स्पिरिट्स को लेकर भी बातचीत सकारात्मक रही है, लेकिन कृषि और डेयरी से जुड़ी शर्तों से कोई समझौता नहीं किया गया.
वैश्विक अनिश्चितता के बीच रणनीतिक साझेदारी
सेफकोविच ने कहा कि यह एफटीए भारत और ईयू दोनों के लिए वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से निपटने का एक रणनीतिक हथियार बनेगा. अमेरिका और चीन पर निर्भरता घटाने, सप्लाई चेन में विविधता लाने और सोलर पैनल व क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है. फिलहाल भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत और ईयू के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत है.
क्यूसीओ, जीएसपी 2027 से लागू होने की तैयारी
एफटीए के तहत क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स (QCOs) जैसे गैर-शुल्क बाधाओं पर भी चर्चा हुई है. ईयू का मानना है कि इन बाधाओं को कम करने से व्यापार को और गति मिलेगी. जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के खत्म होने से जिन सेक्टरों को नुकसान हुआ था, उन्हें एफटीए के जरिए बेहतर अवसर मिलेंगे. दोनों पक्ष 2027 से इस समझौते को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
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