Budget Leak: 1950 में, आज़ादी के सिर्फ तीन साल बाद, भारत का बजट राष्ट्रपति भवन की प्रेस में छपते समय लीक हो गया था. उस समय वित्त मंत्री जॉन मथाई और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे. इस लीक से सरकार में हड़कंप मच गया, क्योंकि बजट की गोपनीयता टूटने से बाजार और आम लोगों पर असर पड़ सकता था. इसी घटना के बाद बजट प्रिंटिंग को राष्ट्रपति भवन से हटाकर नॉर्थ ब्लॉक की सुरक्षित बेसमेंट प्रेस में शिफ्ट किया गया.
उस समय बजट डॉक्यूमेंट्स राष्ट्रपति भवन की प्रेस में छपते थे. यह जगह सरकारी दस्तावेजों के लिए सुरक्षित मानी जाती थी. लेकिन लीक होने से साफ हो गया कि यहां सुरक्षा के इंतजाम कमजोर हैं. लीक होने के कारणों का सटीक पता नहीं चला, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि प्रिंटिंग के दौरान जानकारी बाहर पहुंच गई. इस घटना ने सरकार को झटका दिया. यह स्वतंत्र भारत की पहली बड़ी बजट लीक थी. इससे पहले 1947 या 1948 में भी कुछ लीक की बातें आई थीं, लेकिन 1950 वाली सबसे चर्चित रही.
सरकार ने सुरक्षा को बढ़ाया
लीक होने के बाद सरकार ने तुरंत कदम उठाया. बजट प्रिंटिंग को राष्ट्रपति भवन से हटाकर मिंटो रोड पर एक सरकारी प्रेस में शिफ्ट कर दिया गया. यह जगह ज्यादा सुरक्षित और कंट्रोल्ड थी. यहां से प्रिंटिंग होने लगी ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो. मिंटो रोड की प्रेस में सख्त नियम लगाए गए, जैसे सीमित लोगों को एंट्री, सील्ड कमरे और निगरानी. बाद में 1980 में इसे और मजबूत बनाते हुए नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया गया. आज भी बजट प्रिंटिंग नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होती है. यहां हलवा सेरेमनी होती है, जहां फाइनेंस मिनिस्टर हलवे को कढ़ाई में मिलाते हैं और फिर स्टाफ को बाटां जाता है. इसके बाद बजट बनाने वाले अधिकारियों को लॉक-इन में रखा जाता है. बाहर से कोई संपर्क नहीं, फोन बंद, ताकि कोई जानकारी लीक न हो.
वित्त मंत्री को देना पड़ा था इस्तीफा
1950 के बजट में रेवेन्यू 347.5 करोड़ रुपये और खर्च 337.88 करोड़ था, यानी पहला सरप्लस बजट था. लेकिन लीक की वजह से उपलब्धि पर असर पड़ा. प्लानिंग कमीशन को ज्यादा पावर देने पर भी विरोध हुआ. इन सबके कारण वित्त मंत्री जॉन मथाई को इस्तीफा देना पड़ा. यह घटना बजट की गोपनीयता के लिए बड़ा सबक बनी.
इस लीक ने बजट प्रोसेस को हमेशा के लिए बदल दिया. आज बजट पेश होने से पहले लॉक-इन पीरियड होता है. प्रिंटिंग से जुड़े लोग अलग-थलग रहते हैं. कोई फोन, कोई बाहर जाना नहीं. हलवा सेरेमनी से शुरू होता है और बजट पेश होने तक चलता है. सुरक्षा इतनी कड़ी है कि कोई लीक नहीं होता. 1950 की घटना से सीख लेकर आज के बजट को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाता है. सिर्फ एक छोटी सी गलती कितना बड़ा असर डाल सकती है. 1950 में राष्ट्रपति भवन से प्रिंटिंग शिफ्ट हुई और मिंटो रोड आई, फिर नॉर्थ ब्लॉक बेसमेंट.
नॉर्थ ब्लॉक की बेसमेंट प्रेस में होती है प्रीटिंग
नॉर्थ ब्लॉक की बेसमेंट प्रेस वह सुरक्षित स्थान है, जहां आज भी केंद्रीय बजट समेत कई अहम सरकारी दस्तावेजों की छपाई की परंपरा निभाई जाती है. साल 1950 में बजट लीक की घटना के बाद इसे राष्ट्रपति भवन से हटाकर नॉर्थ ब्लॉक की बेसमेंट में शिफ्ट किया गया, ताकि गोपनीयता पूरी तरह बनी रहे. यहां आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीमित अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में बजट की छपाई होती है, और बजट पेश होने तक किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं होती. यह व्यवस्था बजट की गोपनीयता और विश्वसनीयता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है. आज जब हम बजट का इंतजार करते हैं तो याद रखते हैं कि गोपनीयता कितनी जरूरी है.
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