Indias Export : एक तरफ तो बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर संकट छाया हुआ है और उसके उद्योगों पर ताला लगने की नौबत हो गई है तो दूरी ओर भारत के कपड़ा निर्यात में उछाल आने की संभावना दिख रही है.
हम बात कर रहे हैं कपड़ा उद्योग की, जिसे बांग्लादेश इकनॉमी की रीढ़ माना जाता है. बांग्लादेश में अब इस उद्योग पर फरवरी से ताला लगने की बात कही जा रही है. दूसरी ओर, भारत एक ऐसी ट्रेड डील को क्लोज करने के करीब है, जिसके बाद उसके कपड़ा निर्यात में जबरदस्त उछाल आने की संभावना जताई जा रही है. परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने रविवार को कहा कि भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) देश के परिधान यानी कपड़ा निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन देगा.
कितने निर्यात को होगा फायदा
एईपीसी के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार है और यह व्यापार समझौता भारत के कपड़ा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है. वर्तमान में भारत इस क्षेत्र में 4.5 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के कपड़े का निर्यात करता है. शक्तिवेल ने कहा कि भारतीय कपड़ा निर्यातकों को लंबे समय से बांग्लादेश, वियतनाम और तुर्की जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में शुल्क संबंधी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. अब जबकि बांग्लादेश इस खेल से लगभग बाहर हो रहा है तो भारत के लिए ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा भी कम हो जाएगी.
एफटीए लागू होते ही फायदा
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) के मार्गदर्शन में भारत को यह उम्मीद है कि एफटीए के लागू होने की तिथि से ही परिधान उत्पादों के लिए शून्य-शुल्क बाजार पहुंच प्राप्त होगी. एईपीसी के अनुसार, यह प्रावधान रोजगार आधारित विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूत करने और महिला-केंद्रित विनिर्माण को समर्थन देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. साथ ही, इससे वैश्विक परिधान बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी.
भारत के सस्ते धागे में उलझा बांग्लादेश
बांग्लादेश के कपड़ा उत्पादक संगठनों का कहना है कि भारत और चीन से आने वाले सस्ते धागों से बांग्लादेश के द्योग को गंभीर नुकसान हुआ है. अभी तक स्पिनिंग मिलों की उत्पादन क्षमता 50 फीसदी से ज्यादा घट चुकी है, जबकि 50 से ज्यादा मिलों पर ताला भी लग चुका है. बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग संगठनों ने सरकार से सब्सिडी की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि गैस की कीमतों में बढ़ोतरी होने से पहले ही कपड़ा उद्योग को बड़ा नुकसान हो चुका है. अब यॉर्न यानी कपड़ा बुनाई के धागे पर छाए संकट की वजह से पूरी इंडस्ट्री पर खतरा बढ़ गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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