अगर आप होमबायर हैं और बिल्डर से परेशान हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आप एक ही विवाद के लिए RERA और कंज्यूमर कोर्ट दोनों के दरवाजे नहीं खटखटा सकते.
बिल्डर से है लड़ाई? तो सोच-समझकर चुनें फोरम (AI Generated Image)
क्या था मामला?
रेखा और राज कुमार हेमदेव नाम के दो खरीदारों ने एक प्रोजेक्ट के खिलाफ पहले महाराष्ट्र रेरा (MahaRERA) में शिकायत की थी. बाद में उन्होंने वहां से केस वापस ले लिया और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) में शिकायत दर्ज करा दी. जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने कहा कि एक बार अगर आपने किसी एक जगह को चुन लिया और वहां कार्यवाही शुरू कर दी, तो आप पाला बदलकर दूसरी जगह नहीं जा सकते. इसे कानून की भाषा में ‘इलेक्शन ऑफ रेमेडीज’ कहा जाता है. इसका मकसद लोगों को ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी मर्जी से बार-बार अदालतें बदलना) से रोकना है.
RERA के फायदे और नुकसान
- रियल एस्टेट विवाद जैसे लेट प्रोजेक्ट, पैसे की वापसी और बिल्डर की जिम्मेदारियों के लिए.
- 5 साल तक की शिकायत दर्ज की जा सकती है.
- प्रोजेक्ट डिलिवरी और टाइटल ट्रांसफर के लिए विशेष निर्देश जारी किए जा सकते हैं.
कंज्यूमर कोर्ट के फायदे और नुकसान
- व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदी गई प्रॉपर्टी में खरीदार को कंज्यूमर माना जाता है.
- हर्जाना, मानसिक तनाव या दंडात्मक कार्रवाई जैसी व्यापक राहतें.
- शिकायत केवल दो साल के अंदर करनी होती है और पैसों की सीमा के हिसाब से स्टेट या नेशनल आयोग में जा सकते हैं.
किस फोरम का चुनाव करें?
घर खरीददारों को अब सावधानी से फैसला लेना होगा. RERA में विशेष और तेज प्रक्रिया होती है, जबकि कंज्यूमर कोर्ट में राहत की सीमा और प्रकार ज्यादा व्यापक हो सकते हैं. अगर आप RERA में शिकायत करते हैं और नतीजे से संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपील ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट के जरिए न्याय ले सकते हैं.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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