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- Packaged Food Market To Reach ₹14 Lakh Crore, Midnight Orders For Chocolates And Snacks Surge
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रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार पर यह बाजार 2030 तक 50% बढ़ेगा। – प्रतीकात्मक फोटो
देश का पैकेज्ड फूड और बेवरेज मार्केट रफ्तार पकड़ रहा है। इसकी ग्रोथ का केंद्र अब सिर्फ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि खरीदने का तरीका भी बनता जा रहा है। बेंगलुरु की कंसल्टिंग फर्म रेडसीर की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार पर यह बाजार 2030 तक 50% बढ़कर करीब 14 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा।
असल में ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ रही है। ये लोगों के खान-पान की आदतों में बदलाव ला रहे हैं। अब उपभोक्ता ऑर्डर करने से पहले ज्यादा प्लानिंग नहीं करते, बल्कि एप पर जाकर 10-15 मिनट के भीतर ही फूड आइटम ऑर्डर कर देते हैं। साथ ही कंपनियां छोटे साइज के पैकेट्स पर फोकस कर रही हैं, ताकि यूजर बार-बार खरीदे।
सेल्फ रिवॉर्ड इकोनॉमी
नए ट्रेंड से रेडी-टू-कुक, फ्रोजन और चिल्ड फूड सेगमेंट में तेज ग्रोथ देखने को मिल रही है। इसके अलावा चॉकलेट जैसी कैटेगरी में भी बिक्री रात 9 बजे से आधी रात के बीच अचानक बढ़ रही है। इसे ‘सेल्फ रिवॉर्ड इकोनॉमी’ कहा जा रहा है, जहां लोग दिन खत्म होने पर खुद को ट्रीट देते है। युवाओं के बीच ‘मिडनाइट स्नैकिंग’ या आधी रात को स्नैक्स मंगाकर खाने की आदत बढ़ी है। इस ट्रेंड ने एफएमसीजी कंपनियों के लिए नया ग्रोथ सेगमेंट बना दिया है।
क्विक कॉमर्स के हिसाब से प्रोडक्ट ला रहीं कंपनियां
क्विक कॉमर्स अब निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। इस सेगमेंट में 2030 तक कुल कारोबार 2.3 लाख करोड़ रुपए तक जा सकता है। ये अब महज एक डिलिवरी चैनल न रहकर बाजार को रफ्तार देने वाला सेक्टर बन गया है। कंपनियां प्रोडक्ट लॉन्च, प्राइसिंग और पैकेजिंग तक की रणनीति क्विक कॉमर्स को ध्यान में रखकर तय कर रही हैं। पैकेज्ड फूड और बेवरेज के कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 20% तक पहुंच सकती है। पारंपरिक रिटेल मार्केट पर इस ट्रेंड का नकारात्मक असर पड़ेगा।
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