Dhapu Chaudhary Cyclist Success Story Balotra: बालोतरा के गिड़ा क्षेत्र की धापू चौधरी ने हाथ-पैर में फ्रैक्चर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद राज्य स्तरीय साइक्लिंग में गोल्ड मेडल जीता है. दो बच्चों की माँ होने के बावजूद उन्होंने 20 किमी की रेस में देश भर के 200 साइकलिस्ट को पीछे छोड़कर यह मुकाम पाया है. अब वे अरुणाचल प्रदेश में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगी.
संघर्ष, जिम्मेदारियों और चोटों के बावजूद अगर कोई खिलाड़ी शीर्ष तक पहुंचे तो वह सिर्फ जीत नहीं बल्कि मिसाल बन जाती है. दो बच्चों की माँ धापू ने साइक्लिंग के क्षेत्र में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. गंभीर चुनौतियों के बावजूद धापू ने राज्य स्तरीय साइक्लिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि हौसलों के आगे हालात टिक नहीं पाते हैं.

धापू का साइक्लिंग का सफर आसान नहीं रहा. अभ्यास और प्रतियोगिताओं के दौरान उन्हें हाथ और पैर में फ्रैक्चर हो गया और डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी लेकिन धापू का जज्बा इससे कहीं बड़ा था. इलाज के साथ-साथ उन्होंने दोबारा खुद को तैयार किया. घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच लगातार अभ्यास करना धापू के लिए बड़ी चुनौती थी. दो बच्चों की माँ होने के बावजूद उन्होंने खेल को कभी पीछे नहीं छोड़ा. सुबह जल्दी उठकर अभ्यास, दिनभर परिवार की जिम्मेदारी और फिर खुद को फिट रखने की मेहनत, यही उनकी दिनचर्या रहती थी.

बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र के जाखडा गांव की धापू चौधरी ने राज्य स्तरीय एमटीबी ट्रायल साइक्लिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर न केवल जाखडा बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है. यह प्रतियोगिता जयपुर के छप्पर चौराहे से शुरू होकर रामपुरा गोनेर के पास के उबड़ खाबड़ रास्तो से होते हुए जयपुर में सम्पन्न हुई. इस प्रतियोगिता में देशभर के 200 से अधिक साइकलिस्ट ने भाग लिया. उन्होंने वीमेन एलीट यू-23 वर्ग में 20 किलोमीटर रेस में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है.
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इसके साथ ही धापू का चयन राष्ट्रीय एमटीबी साइक्लिंग प्रतियोगिता के लिए हुआ है. यह प्रतियोगिता 12 से 15 फरवरी तक अरुणाचल प्रदेश में आयोजित की जाएगी. इसमें धापू राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व करेगी. धापू अब तक 4 बार राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी है. उनकी सफलता के पीछे कोच खेताराम की मेहनत और मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि धापू एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं.

धापू की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वह दो बच्चों की माँ हैं. घर परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने साइक्लिंग के जुनून को कभी कम नहीं होने दिया. वे न केवल खुद नियमित अभ्यास करती रहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की अन्य छात्राओं को भी प्रशिक्षण देती रहीं. उनकी प्रशिक्षित की हुई कई छात्राएं भी साइक्लिंग में नेशनल स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं.

बीते वर्ष साइक्लिंग के दौरान गिरने से धापू के हाथ-पैर में फ़्रैक्चर हो गया था. बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और स्वस्थ होते ही वे फिर से अभ्यास में जुट गईं. पिता नैनाराम और पति ईश्वरलाल के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन से उन्होंने कठिन परिस्थितियों को मात देकर राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि मजबूत जज्बा हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है.
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